रांची | 16 जुलाई 2026
झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में लंबे समय से ड्यूटी से गायब चल रहे डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन सहायक प्राध्यापकों ने नियुक्ति और पदस्थापन के बावजूद अब तक अपने संस्थान में योगदान नहीं दिया है, उन्हें 28 जुलाई 2026 तक हर हाल में जॉइन करना होगा। तय समयसीमा के भीतर योगदान नहीं देने पर उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी जाएगी और उनकी सेवा स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
पहले भी जारी किया गया था नोटिस
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि 18 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना के तहत विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति और पदस्थापन किया गया था। इसके बावजूद कई डॉक्टरों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। इसके बाद 18 जून को भी विभाग ने उन्हें तत्काल योगदान देने का निर्देश दिया था, लेकिन कई चिकित्सक बिना कोई कारण बताए अनुपस्थित रहे।
एनएमसी के नियमों का बढ़ा दबाव
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की निर्धारित संख्या सुनिश्चित करने पर लगातार जोर दे रहा है। शिक्षकों की कमी के कारण मेडिकल सीटों के विस्तार और शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से विभाग ने अनुपस्थित डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया है।
इन डॉक्टरों पर कार्रवाई की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग की सूची में डॉ. रोहित, डॉ. मनीष कुमार मुंडा, डॉ. अभिषेक जायसवाल, डॉ. विनीत गर्ग, डॉ. कार्तिक चंद्र बेसरा, डॉ. अविनाश कुमार, डॉ. कुणाल राज, डॉ. प्रिथा रॉय, डॉ. शिवशंकर मुंडा, डॉ. लाल बहादुर प्रसाद, डॉ. संदीप मारकुस और डॉ. तरुण कुमार सहित कई चिकित्सकों के नाम शामिल हैं। विभाग ने साफ किया है कि 28 जुलाई के बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।




