रांची | 13 जुलाई 2026

झारखंड की गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार अगले महीने से आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से टेक होम राशन (THR) का वितरण दोबारा शुरू करने जा रही है। करीब चार महीने से बंद पड़ी इस योजना को फिर से शुरू करने के लिए महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के प्रस्ताव को वित्त विभाग से मंजूरी मिल गई है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।

14 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिलेगा फायदा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना दोबारा शुरू होने से 14 लाख से अधिक लाभार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। इनमें गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं और छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं। एजेंसी चयन में देरी के कारण अप्रैल 2026 से टेक होम राशन का वितरण बंद था, जिससे हजारों परिवार आवश्यक पोषण सामग्री से वंचित हो गए थे।

क्या मिलेगा टेक होम राशन में?

टेक होम राशन योजना के तहत लाभार्थियों को घर ले जाने के लिए पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इसमें पोषण मानकों के अनुरूप दाल, सोयाबीन, मूंगफली तथा रेडी-टू-कुक मिश्रण जैसे खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराना तथा कुपोषण की समस्या को कम करना है।

नई एजेंसी के चयन तक पुरानी एजेंसियों को राहत

वित्त विभाग ने फिलहाल राशन आपूर्ति करने वाली एजेंसियों को सशर्त अवधि विस्तार देने की अनुमति दी है। विभाग ने निर्देश दिया है कि अगले छह महीनों के भीतर नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया पूरी की जाए। इसके लिए जल्द ही नया टेंडर जारी किया जाएगा। वर्तमान में आदित्य फ्लोर लिमिटेड, कोटा दाल मील और इंटर लिक्स फूड्स प्राइवेट लिमिटेड को विभिन्न जिलों में आपूर्ति की जिम्मेदारी दी गई है।

क्यों बंद हुई थी योजना?

31 मार्च 2026 को राशन आपूर्ति करने वाली एजेंसियों का कार्यकाल समाप्त हो गया था। समय पर नई एजेंसी का चयन नहीं होने और पुरानी एजेंसियों को अवधि विस्तार नहीं मिलने के कारण अप्रैल से पूरे राज्य में टेक होम राशन का वितरण बंद हो गया था। अब वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद सरकार इसे दोबारा शुरू करने की तैयारी में जुट गई है।

पोषण स्तर सुधारने की दिशा में अहम कदम

सरकार का मानना है कि टेक होम राशन योजना दोबारा शुरू होने से मातृ एवं शिशु पोषण में सुधार होगा और आंगनबाड़ी से जुड़े लाखों लाभार्थियों को नियमित पोषाहार मिल सकेगा। इससे कुपोषण की रोकथाम और स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।