रांची | 14 जुलाई 2026

झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में विकास योजनाओं के लिए आवंटित 18,901.74 करोड़ रुपये पिछले कई वर्षों से खर्च नहीं हो सके हैं। यह पूरी राशि अलग-अलग विभागों के पर्सनल लेजर (PL) अकाउंट में जमा रही, जिससे विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। मामले को गंभीरता से लेते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सभी विभागीय सचिवों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि 1 अप्रैल 2023 से पहले की पीएल अकाउंट में जमा राशि तत्काल राजकोष में वापस जमा कराई जाए।

वित्त मंत्री ने दोबारा जारी किया सख्त निर्देश

वित्त मंत्री ने बताया कि विभागों की ओर से वर्षों से पीएल अकाउंट में पड़ी राशि को खर्च करने की अनुमति मांगी जा रही थी, लेकिन यह वित्तीय अनुशासन के खिलाफ है। इसी कारण 19 जून को पहला पत्र जारी किया गया था और कार्रवाई में तेजी लाने के लिए 10 जुलाई को एक बार फिर सभी विभागों को निर्देश भेजा गया। सरकार ने साफ किया है कि चालू वित्तीय वर्ष समेत अधिकतम पिछले तीन वित्तीय वर्षों की राशि ही पीएल अकाउंट में रखी जा सकेगी।

क्या होता है पीएल अकाउंट?

जब कोई विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी योजना की राशि खर्च नहीं कर पाता, तो उसे राजकोष में वापस जमा करने के बजाय पीएल अकाउंट में स्थानांतरित कर देता है। कई मामलों में यही राशि वर्षों तक बिना उपयोग के पड़ी रहती है। पूर्व वित्त सचिव अमित खरे ने पहले ही दो वर्ष से अधिक समय तक राशि रखने पर रोक संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए थे, लेकिन कई विभागों ने उनका पालन नहीं किया।

किन विभागों में सबसे ज्यादा राशि?

आंकड़ों के अनुसार ऊर्जा विभाग के पीएल अकाउंट में सबसे अधिक 3,943.39 करोड़ रुपये जमा हैं। इसके बाद शहरी विकास एवं आवास विभाग में 2,876.94 करोड़, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में 1,957.60 करोड़, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग में 1,922.09 करोड़, सड़क निर्माण विभाग में 1,853.67 करोड़ और कल्याण विभाग में 1,229.08 करोड़ रुपये पड़े हैं। अन्य विभागों में भी हजारों करोड़ रुपये निष्क्रिय पड़े हुए हैं।

सरकार चाहती है योजनाओं में आए तेजी

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वित्त विभाग की सख्ती के बाद अब तक करीब 3,000 करोड़ रुपये राजकोष में वापस जमा भी कराए जा चुके हैं। सरकार का मानना है कि निष्क्रिय राशि को वापस लाकर विकास योजनाओं में तेजी लाई जा सकती है और वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत किया जा सकता है।