रांची | 17 जुलाई 2026

झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इलाज कराने आने वाले मरीजों को उपचार से पहले ही बदहाल व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के कई वार्डों के बाहर टूटे फर्श, उखड़े रास्ते और जर्जर भवन मरीजों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। ट्रॉली और व्हीलचेयर पर ले जाए जा रहे गंभीर मरीजों को हर कदम पर झटके लगते हैं, जिससे उनका दर्द और बढ़ जाता है। हैरानी की बात यह है कि पिछले तीन वर्षों से स्थिति लगभग जस की तस बनी हुई है।

हर दिन हजारों मरीज प्रभावित

रिम्स की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 2,500 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जबकि सेंट्रल इमरजेंसी में 275 से अधिक गंभीर मरीज भर्ती होते हैं। मेडिसिन और सर्जरी आईसीयू के बाहर टूटे फर्श और खराब रास्तों के कारण मरीजों को वार्ड तक पहुंचाना भी चुनौती बन गया है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी मरीजों को राहत मिलने के बजाय अतिरिक्त तकलीफ झेलनी पड़ती है।

मरम्मत के दावों पर उठ रहे सवाल

रिम्स प्रशासन का कहना है कि भवन के जीर्णोद्धार का कार्य चरणबद्ध तरीके से चल रहा है और पहले बाहरी संरचना को मजबूत किया जा रहा है। हालांकि मौके की स्थिति बताती है कि मरम्मत की रफ्तार बेहद धीमी है और सीमित मजदूरों के कारण काम समय पर पूरा होता नहीं दिख रहा।

पेइंग वार्ड की सुविधाएं भी बदहाल

करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से बने 100 कमरों वाले पेइंग वार्ड में फिलहाल केवल 76 कमरे ही उपयोग में हैं, जबकि 32 कमरे जर्जर हालत में हैं। कई कमरों में दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है, बाथरूम खराब हैं और टीवी-फ्रिज जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद मरीजों से प्रतिदिन 1,500 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है। मरीजों और उनके परिजनों ने जल्द मरम्मत और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।