बोकारो | 08 जुलाई 2026

झारखंड के बोकारो जिले के कसमर प्रखंड स्थित बगदा गांव के किसान गणेश महतो ने अपने अदम्य साहस और मेहनत से आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी पूरे इलाके में चर्चा हो रही है। सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण खेती प्रभावित हो रही थी। कई बार सरकारी सहायता के लिए आवेदन करने के बावजूद समय पर मदद नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने किसी का इंतजार करने के बजाय खुद कुदाल और फावड़ा उठाया और अकेले ही कुआं खोदने का निर्णय लिया।

छह महीने की मेहनत से तैयार किया 29 फीट गहरा कुआं

गणेश महतो ने लगातार लगभग छह महीने तक अकेले मेहनत कर करीब 29 फीट गहरा सिंचाई कुआं तैयार कर दिया। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया। गांव के लोगों का कहना है कि उनका यह कुआं केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और मेहनत का प्रतीक बन गया है। इसी वजह से लोग उन्हें अब "बोकारो का दशरथ मांझी" कहकर सम्मान दे रहे हैं।

DC पहुंचे किसान के घर, मदद का दिया भरोसा

जब किसान की मेहनत की जानकारी बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा को मिली तो वे स्वयं बगदा गांव पहुंचे। उन्होंने कुएं का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उपायुक्त ने किसान के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मेहनती और जुझारू लोगों के साथ जिला प्रशासन पूरी मजबूती से खड़ा है और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

10 दिन में होगी मरम्मत, मिलेगा सोलर पंप

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने बताया कि कुएं के शेष निर्माण और मरम्मत का कार्य अगले 10 दिनों के भीतर पूरा कराया जाएगा। इसके लिए प्रशासन जल्द ही तकनीकी आकलन (एस्टीमेट) तैयार करेगा। साथ ही किसान गणेश महतो को जिला प्रशासन की ओर से सोलर पंप भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे सिंचाई की बेहतर व्यवस्था कर अपनी खेती को और मजबूत बना सकें।

संघर्ष बना पूरे समाज के लिए प्रेरणा

गणेश महतो की कहानी यह संदेश देती है कि सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों को रोक नहीं सकतीं। उनका संघर्ष आज ग्रामीणों के साथ-साथ प्रशासन के लिए भी प्रेरणा बन गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि ऐसे मेहनती किसानों को समय पर सरकारी सहयोग मिले तो ग्रामीण कृषि और अधिक सशक्त बन सकती है।