रांची | 13 जुलाई 2026

झारखंड में शराब की बिक्री से सरकार की कमाई लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में राज्य के उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने 1272 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। यह विभाग द्वारा तय 1169 करोड़ रुपये के लक्ष्य से 103 करोड़ रुपये अधिक है। पहली तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो सरकार इस वर्ष 4600 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व लक्ष्य को भी आसानी से पार कर सकती है।

तीनों महीनों में 400 करोड़ से अधिक की कमाई

विभाग के अनुसार अप्रैल में 424.38 करोड़ रुपये, मई में लगभग 425 करोड़ रुपये और जून में करीब 423 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। लगातार तीन महीनों तक 400 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली इस बात का संकेत है कि राज्य में शराब की वैध बिक्री और कर संग्रह दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

दो साल में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची सरकारी आय

वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार को शराब से करीब 4010 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 2710 करोड़ रुपये था। राज्य गठन के शुरुआती वर्षों में जहां शराब से सालाना आय करीब 102 करोड़ रुपये थी, वहीं अब यह कई गुना बढ़ चुकी है। सरकार ने इसी प्रदर्शन को देखते हुए चालू वित्तीय वर्ष के लिए 4600 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया है।

क्यों बढ़ रही है शराब से कमाई?

विशेषज्ञों के अनुसार नई उत्पाद नीति, लाइसेंस व्यवस्था में पारदर्शिता, अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई और प्रीमियम ब्रांड की बढ़ती मांग राजस्व वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। विभाग का दावा है कि अवैध कारोबार पर लगाम लगाने से वैध बिक्री में बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा फायदा सरकारी खजाने को मिला है।

सरकार को लक्ष्य पार करने का भरोसा

उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि पहली तिमाही के शानदार प्रदर्शन से साफ है कि विभाग इस वर्ष भी निर्धारित लक्ष्य से अधिक राजस्व हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में झारखंड शराब राजस्व का नया रिकॉर्ड बनाएगा।