धनबाद | 21 जुलाई 2026
धनबाद के चर्चित सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे गैंगस्टर फहीम खान को बड़ी कानूनी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें फहीम खान को रिहा करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने झारखंड सरकार की अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की राज्य सरकार की अपील
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार और फहीम खान की ओर से पेश दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि हाईकोर्ट का आदेश कानून के अनुरूप है और उसमें बदलाव की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही फहीम खान की रिहाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
हाईकोर्ट ने 1984 की रिमिशन नीति को माना था लागू
झारखंड हाईकोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को सुनवाई के दौरान कहा था कि फहीम खान के मामले में 2007 की संशोधित रिमिशन नीति लागू नहीं होगी, क्योंकि संबंधित मुकदमे का फैसला पुराने कानून के दायरे में आया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि इस मामले में 1984 की रिहाई नीति लागू होगी और उसी आधार पर रिहाई पर विचार किया जाना चाहिए।
1989 के हत्याकांड से जुड़ा है मामला
यह मामला 10 मई 1989 को धनबाद के वासेपुर में सगीर हसन सिद्दीकी की हत्या से जुड़ा है। वर्ष 2009 में झारखंड हाईकोर्ट ने फहीम खान को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। अब रिमिशन नीति को लेकर आए ताजा फैसले के बाद उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह निर्णय पुराने मामलों में रिमिशन नीति लागू करने को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।




