धनबाद | 22 जुलाई 2026
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) जोड़ापोखर घोटाले में पहले से जेल में बंद आरोपी प्रमोद कुमार सिंह की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। धनबाद एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने प्रमोद सिंह और उसकी पत्नी प्रिया सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में विशेष अदालत में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि करीब 17 हजार रुपये मासिक मानदेय पाने वाले संविदा कर्मी ने अपनी वैध आय से कई गुना अधिक संपत्ति अर्जित की।
17 हजार की नौकरी, करोड़ों की संपत्ति का आरोप
एसीबी की जांच के अनुसार प्रमोद कुमार सिंह वर्ष 2008 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) में संविदा पर नियुक्त हुआ था। वह झरिया और जोड़ापोखर क्षेत्र में ब्लॉक अकाउंट मैनेजर के रूप में कार्यरत था। उसके जिम्मे सरकारी योजनाओं के फंड का लेखा-जोखा, भुगतान और कैश बुक का रखरखाव था। जांच में दावा किया गया कि इसी पद का दुरुपयोग कर उसने सरकारी राशि का गबन किया और उससे अवैध संपत्ति खड़ी की।
रिश्तेदारों के खातों से चला पैसों का खेल
एसीबी के अनुसार प्रमोद सिंह ने कथित रूप से सरकारी धन को सीधे अपने खाते में लेने के बजाय रिश्तेदारों और करीबी लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराया। बाद में वही रकम वापस लेकर उसका इस्तेमाल जमीन, मकान और अन्य संपत्तियां खरीदने में किया गया। जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि उसने एक लग्जरी वाहन पहले अपने करीबी के नाम खरीदा और बाद में उसे पत्नी प्रिया सिंह के नाम स्थानांतरित करा दिया।
554 प्रतिशत अधिक संपत्ति का दावा
चार्जशीट में एसीबी ने दावा किया है कि प्रमोद सिंह और उसकी पत्नी ने अपनी ज्ञात आय के मुकाबले लगभग 554 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की। जांच के दौरान इतनी बड़ी संपत्ति के लिए कोई वैध आय स्रोत सामने नहीं आया। इसी आधार पर दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।
ईडी पहले ही कर चुकी है संपत्ति जब्त
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी पहले से जांच कर रहा है। वर्ष 2024 में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रमोद सिंह की लगभग 1.63 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की थी। इसमें धनबाद स्थित मकान, जमीन, तीन लग्जरी वाहन, नकदी और बैंक खातों में जमा राशि शामिल थी। जांच एजेंसी के अनुसार पूछताछ के लिए कई बार समन भेजे जाने के बावजूद प्रमोद सिंह उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। वह फरवरी 2025 से न्यायिक हिरासत में है। उसके खिलाफ एनआरएचएम से जुड़े लगभग 9.39 करोड़ रुपये के कथित गबन और धन शोधन की जांच अभी भी जारी है।




