गिरिडीह | 22 जुलाई 2026
झारखंड के गिरिडीह जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन की एरिया कमेटी सदस्य और कई गंभीर मामलों में वांछित महिला नक्सली अनिता किस्कू उर्फ बबिता ने बुधवार को गिरिडीह पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस का कहना है कि यह आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे अन्य सक्रिय नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने का संदेश मिलेगा।
15 वर्षों तक रही माओवादी संगठन में सक्रिय
गिरिडीह पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि अनिता किस्कू वर्ष 2009 में भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़ी थी। संगठन में रहते हुए वह पारसनाथ जोन, लुगू पहाड़ी, झुमरा पहाड़ी और कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय रही। इस दौरान वह हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री छिपाने, लेवी वसूली तथा संगठन की अन्य गतिविधियों में शामिल रही।
पुलिस के अनुसार अनिता के खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में यूएपीए, आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और सीएलए एक्ट समेत कुल 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पति की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई के बाद बदला फैसला
एसपी डॉ. बिमल कुमार ने बताया कि संगठन के भीतर कथित शोषण, पुलिस के लगातार दबाव और उसके पति अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद अनिता का संगठन से मोहभंग हो गया। इसके बाद उसने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
सरकार देगी आर्थिक सहायता और पुनर्वास
झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति "नई दिशा-एक नई पहल" के तहत अनिता किस्कू को 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसमें 50 हजार रुपये की तत्काल सहायता प्रदान कर दी गई है, जबकि शेष राशि नियमानुसार उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा सरकार उसके आवास, भोजन, सुरक्षा, पुनर्वास और न्यायालय में लंबित मामलों से जुड़े कानूनी खर्च का भी वहन करेगी।
अन्य नक्सलियों से की मुख्यधारा में लौटने की अपील
आत्मसमर्पण के बाद अनिता किस्कू ने नक्सलवाद को गलत रास्ता बताते हुए संगठन में सक्रिय अन्य सदस्यों से भी हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति के माध्यम से सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलता है और हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।
गिरिडीह पुलिस का मानना है कि इस आत्मसमर्पण से नक्सल विरोधी अभियान को नई मजबूती मिलेगी और जंगलों में सक्रिय अन्य उग्रवादियों के बीच भी सकारात्मक संदेश जाएगा।




