रांची | 25 जुलाई 2026
गिरिडीह में सड़क दुर्घटना में ट्रक चालक की मौत के करीब 12 साल बाद उसकी पत्नी को न्याय मिला है। रांची हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को मृतक की पत्नी को निर्धारित मुआवजे के साथ दुर्घटना की तारीख से ब्याज, 50 प्रतिशत जुर्माना और अंतिम संस्कार का खर्च भी देने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम एक कल्याणकारी कानून है और इसका उद्देश्य पीड़ित परिवार को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
श्रम न्यायालय के आदेश में किया संशोधन
जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने वर्ष 2014 में देवघर के श्रम न्यायालय द्वारा पारित आदेश में संशोधन करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि श्रम न्यायालय ने मुआवजा तो निर्धारित किया, लेकिन कानून के तहत ब्याज और जुर्माने के प्रावधानों पर पर्याप्त विचार नहीं किया।
एक महीने में भुगतान नहीं होने पर ब्याज अनिवार्य
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के अनुसार यदि दुर्घटना के एक महीने के भीतर मुआवजे का भुगतान नहीं किया जाता है, तो बीमा कंपनी या संबंधित पक्ष पर ब्याज देना अनिवार्य हो जाता है। गंभीर परिस्थितियों में 50 प्रतिशत तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
पीड़ित परिवार को मिली बड़ी राहत
अदालत ने माना कि मृतक ट्रक चालक लक्ष्मण मंडल की पत्नी सुदामा देवी को समय पर मुआवजा नहीं मिलने से उन्हें लंबे समय तक आर्थिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हाईकोर्ट के इस फैसले को कर्मचारी हितों और दुर्घटना पीड़ित परिवारों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




