नई दिल्ली | 31 जुलाई 2026

अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों के लिए प्रस्तावित नई नीति को लेकर भारत में चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ऐसे विदेशी छात्रों पर विशेष शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में नौकरी करना चाहते हैं। इस संभावित कदम का असर बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है।

इसी बीच भारत के पूर्व राजनयिक कंवल सिब्बल ने अमेरिका की आर्थिक और शिक्षा नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया के देशों से अपने बाजार खोलने की अपेक्षा करता है, लेकिन स्वयं लगातार अपनी अर्थव्यवस्था को सीमित करने की दिशा में बढ़ रहा है।

अमेरिका की नीति पर सिब्बल की प्रतिक्रिया

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यदि अमेरिका विदेशी छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है, तो भारतीय छात्रों की वहां पढ़ाई के प्रति रुचि और कम हो सकती है। उनके मुताबिक, यह बदलाव शुरुआती तौर पर चुनौतीपूर्ण जरूर होगा, लेकिन लंबे समय में भारत के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है।

शिक्षा संबंधों पर पड़ सकता है असर

कंवल सिब्बल ने कहा कि शिक्षा किसी भी दो देशों के बीच मजबूत संबंधों का महत्वपूर्ण आधार होती है। यदि अमेरिका अपनी नीतियों को अधिक प्रतिबंधात्मक बनाता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका के शैक्षणिक और द्विपक्षीय संबंधों पर भी दिखाई दे सकता है। उन्होंने कहा कि लगातार बदलती अमेरिकी नीतियां यह संकेत देती हैं कि किसी भी क्षेत्र में एक ही देश पर अत्यधिक निर्भर रहना उचित नहीं है।

भारतीय छात्रों पर क्या होगा प्रभाव ?

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका में इस समय 3.60 लाख से अधिक भारतीय छात्र अध्ययन कर रहे हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन (IIE) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में पढ़ने वाले कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारतीय छात्रों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। इनमें अधिकांश छात्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यदि प्रस्तावित शुल्क लागू होता है, तो अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी की योजना बना रहे भारतीय छात्रों की लागत बढ़ सकती है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।