नई दिल्ली | 04 अगस्त 2026
भारत के पड़ोसी देशों में अपनी सैन्य पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटा चीन अब बांग्लादेश के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन बांग्लादेश को अपने J-10CE मल्टीरोल फाइटर जेट देने की पेशकश कर रहा है। इस संभावित डील को लेकर भारत में रणनीतिक नजरिए से चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बेहद करीब है।
हालांकि, बांग्लादेश की ओर से इस सौदे को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और इस तरह की रक्षा डील पर अंतिम निर्णय कई रणनीतिक और राजनीतिक पहलुओं पर निर्भर करता है।
J-10CE डील को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा ?
रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन बांग्लादेश को J-10CE लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रहा है। इस संभावित समझौते में लड़ाकू विमानों के साथ प्रशिक्षण, रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएं भी शामिल होने की बात कही जा रही है। J-10CE चीन का आधुनिक मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे पाकिस्तान पहले ही अपनी वायुसेना में शामिल कर चुका है।
पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश को J-10CE देने की तैयारी
चीन ने पहले पाकिस्तान को J-10CE फाइटर जेट उपलब्ध कराए थे। पाकिस्तान वायुसेना में इन विमानों के शामिल होने के बाद दक्षिण एशिया में एयर पावर बैलेंस को लेकर चर्चा हुई थी। अब अगर बांग्लादेश भी चीनी फाइटर जेट को अपनी वायुसेना में शामिल करता है तो भारत के पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर चीनी सैन्य तकनीक की मौजूदगी बढ़ सकती है।
भारत के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर क्यों है अहम?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसे 'चिकन नेक' कहा जाता है भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह इलाका रणनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में भारत के पड़ोसी देश में आधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती को सुरक्षा विशेषज्ञ करीब से देखते हैं।
लालमोनिरहाट एयरबेस को लेकर चिंता
बांग्लादेश का लालमोनिरहाट एयरबेस भारत की सीमा के नजदीक स्थित है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के आधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती सीमावर्ती क्षेत्रों के करीब होती है तो क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, किसी भी देश द्वारा अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाना उसका संप्रभु अधिकार है, लेकिन पड़ोसी देशों के सैन्य संतुलन पर इसका असर जरूर पड़ता है।
क्या J-10CE राफेल को टक्कर दे सकता है ?
J-10CE को चीन का उन्नत लड़ाकू विमान माना जाता है और इसकी तुलना कई बार फ्रांस के राफेल से की जाती है। दोनों विमानों की तकनीक, भूमिका और क्षमताओं को लेकर रक्षा विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय है। राफेल भारतीय वायुसेना का अहम लड़ाकू विमान है, जबकि J-10CE चीन के निर्यात बाजार का प्रमुख फाइटर जेट है।
चीन की क्षेत्रीय रणनीति पर उठ रहे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण एशिया में अपनी सैन्य और आर्थिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भारत के लिए चुनौती यह है कि उसके आसपास के देशों में चीन की रक्षा तकनीक और सैन्य प्रभाव कितना बढ़ता है।
बांग्लादेश की रक्षा जरूरत बनाम क्षेत्रीय राजनीति
बांग्लादेश लंबे समय से अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण की योजना पर काम कर रहा है। ऐसे में किसी भी नए फाइटर जेट की खरीद को उसकी रक्षा जरूरतों के नजरिए से भी देखा जा रहा है। लेकिन भारत और चीन के बीच जारी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण बांग्लादेश की कोई भी बड़ी रक्षा डील क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण मानी जाती है।




