नई दिल्ली/काठमांडू, 3 अगस्त। भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती को लेकर भारत और नेपाल के बीच जारी गतिरोध अभी भी खत्म होता नहीं दिख रहा है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि नेपाली नागरिकों की भर्ती केवल अग्निपथ योजना के तहत ही होगी, जबकि नेपाल सरकार इस योजना का विरोध जारी रखे हुए है। इस मतभेद के कारण वर्ष 2022 से नेपाली गोरखाओं की भारतीय सेना में नई भर्ती रुकी हुई है। उधर, नेपाल का कहना है कि अग्निपथ योजना की चार वर्षीय सेवा अवधि और पारंपरिक पेंशन व्यवस्था का अभाव 1947 के भारत-नेपाल-ब्रिटेन त्रिपक्षीय समझौते की भावना के अनुरूप नहीं है। इस पर भारत सरकार को फिर से विचार करना चाहिए। दूसरी ओर भारत का रुख साफ है कि भारतीय सेना में अब सभी नई भर्तियां अग्निपथ मॉडल के तहत ही होंगी और इसमें किसी प्रकार का अलग प्रावधान नहीं किया जाएगा।
2022 से बंद है भर्ती प्रक्रिया
भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती दशकों से होती रही है, पर अग्निपथ योजना लागू होने के बाद नेपाल सरकार ने अपने नागरिकों की इस योजना के तहत भर्ती पर आपत्ति जताई। इसके बाद से नई भर्ती प्रक्रिया रुकी हुई है और अब तक दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी है।
भारत का कहना है कि भर्ती नीति सभी उम्मीदवारों के लिए समान है और अग्निपथ योजना ही भारतीय सेना में प्रवेश का एकमात्र माध्यम है।
क्या है नेपाल की आपत्ति ?
नेपाल सरकार का तर्क है कि चार वर्ष की सेवा और उसके बाद सीमित अवसर की व्यवस्था पारंपरिक सैन्य सेवा मॉडल से अलग है। उसका मानना है कि इससे नेपाली युवाओं के भविष्य और 1947 के त्रिपक्षीय समझौते की मूल भावना पर असर पड़ता है। इसी कारण काठमांडू लगातार इस योजना का विरोध कर रहा है।
ब्रिटिश सेना के लिए बढ़ सकता है अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत और नेपाल के बीच गतिरोध लंबा खिंचता है, तो नेपाली युवाओं का रुझान ब्रिटिश सेना की ओर बढ़ सकता है। ब्रिटिश सेना पहले से नेपाली गोरखाओं की भर्ती करती रही है और हाल के वर्षों में उसने 'किंग्स गोरखा आर्टिलरी (KGA)' जैसी नई इकाई के गठन की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। इससे भविष्य में नेपाली युवाओं के लिए भर्ती के अवसर बढ़ सकते हैं।
अग्निपथ योजना की प्रमुख विशेषताएं
- भारतीय सेना में भर्ती चार वर्ष की अवधि के लिए होती है।
- चयनित अग्निवीरों में से लगभग 25 प्रतिशत को आगे नियमित सेवा का अवसर मिलता है।
- शेष अग्निवीरों को सेवा समाप्ति पर वित्तीय पैकेज प्रदान किया जाता है।
- सेवा अवधि के दौरान बीमा और अन्य निर्धारित सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
भारत-नेपाल संबंधों पर असर
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि गोरखा भर्ती केवल सैन्य विषय नहीं बल्कि भारत-नेपाल के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। ऐसे में इस मुद्दे का समाधान दोनों देशों के लिए अहम माना जा रहा है। फिलहाल भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती का भविष्य नेपाल सरकार के रुख और दोनों देशों के बीच संभावित सहमति पर निर्भर करेगा।




