ट्रेन में चोरी या छिनतई हुई तो रेलवे नहीं झाड़ सकेगा पल्ला, आयोग ने सुनाया बड़ा फैसला

पटना: ट्रेन में सफर के दौरान चोरी या छिनतई की घटनाएं अक्सर यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती हैं। ऐसे मामलों में रेलवे अक्सर यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट जाता था कि सामान की बुकिंग नहीं कराई गई थी। लेकिन अब जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि आरक्षित कोच में यात्रा कर रहे यात्रियों और उनके साथ मौजूद निजी सामान की सुरक्षा सुनिश्चित करना रेलवे की जिम्मेदारी है। यदि सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के कारण चोरी या छिनतई होती है तो रेलवे जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।

12 साल पुराने मामले में आया अहम फैसला

यह फैसला वर्ष 2014 में हुई एक घटना से जुड़ा है। पटना निवासी निशांत कुमार सागर अपनी मां के साथ 21 अगस्त 2014 को संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस के आरक्षित कोच से दिल्ली जा रहे थे। यात्रा के दौरान कानपुर आउटर के पास एक बदमाश उनकी मां का हैंडबैग छीनकर फरार हो गया।

बैग में करीब 13 हजार रुपये नकद, सोने के आभूषण, सैमसंग मोबाइल फोन और अन्य कीमती सामान था। कुल नुकसान लगभग 1.25 लाख रुपये आंका गया। घटना के बाद कानपुर जीआरपी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

रेलवे की दलील आयोग ने खारिज की

मामले की सुनवाई के दौरान रेलवे ने दलील दी कि हैंडबैग लगेज के रूप में बुक नहीं कराया गया था, इसलिए उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे की नहीं बनती। रेलवे ने अपने पक्ष में रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा-100 का भी हवाला दिया।

हालांकि आयोग ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि हैंडबैग यात्री का निजी सामान होता है, जिसे वह यात्रा के दौरान अपने साथ रखता है। ऐसे सामान की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी रेलवे की जिम्मेदारी है। यदि सुरक्षा व्यवस्था में कमी साबित होती है तो इसे सेवा में कमी (Deficiency in Service) माना जाएगा।

रेलवे को देना होगा मुआवजा

आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत खरीद बिल और अन्य साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए रेलवे को 1,25,610 रुपये का भुगतान 22 अगस्त 2014 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए 25 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये अलग से देने का निर्देश दिया गया।

60 दिनों में आदेश का पालन करने का निर्देश

आयोग ने पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल और मुख्य वाणिज्य प्रबंधक, हाजीपुर को निर्देश दिया है कि वे 60 दिनों के भीतर इस आदेश का पालन करें। इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब आरक्षित डिब्बों में सुरक्षा में लापरवाही होने पर यात्री उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाकर न्याय और मुआवजा दोनों प्राप्त कर सकते हैं।