कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी को पत्र लिखकर प्रदेश अध्यक्ष पद से तत्काल प्रभाव से मुक्त किए जाने की जानकारी दी।
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने केवल प्रदेश अध्यक्ष पद ही नहीं छोड़ा, बल्कि पार्टी के बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) के अधिकार, संगठन से जुड़े सभी दायित्वों और भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष पार्टी की अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में अपनी जिम्मेदारियां भी वापस ले ली हैं।
हालांकि, उनके इस्तीफे के पीछे की आधिकारिक वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई है।
चुनावी हार के बाद बढ़ा था संगठनात्मक संकट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद तृणमूल कांग्रेस लगातार संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है। चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी नेतृत्व ने संगठन में बड़े बदलाव किए थे।
इसी क्रम में 5 जून को कोलकाता स्थित कालीघाट में ममता बनर्जी के आवास पर हुई राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में वरिष्ठ नेता सुब्रत बख्शी को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर चंद्रिमा भट्टाचार्य को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
पार्टी नेतृत्व को उम्मीद थी कि वह संगठन को दोबारा मजबूत करेंगी और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करेंगी। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष बनने के कुछ ही समय बाद उनके इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
खुद भी विधानसभा चुनाव हार चुकी थीं
चंद्रिमा भट्टाचार्य पश्चिम बंगाल सरकार में वरिष्ठ मंत्री रह चुकी हैं। हालांकि, वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें दमदम उत्तर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार सौरभ सिकदार के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
चुनावी हार के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी।
इस्तीफे से बढ़ीं राजनीतिक अटकलें
चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और संगठनात्मक चुनौतियों के बीच यह फैसला लिया गया है। हालांकि, इन अटकलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में जब पार्टी पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है, प्रदेश अध्यक्ष का इस्तीफा संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा सकता है।
पार्टी पहले से कई चुनौतियों का कर रही सामना
तृणमूल कांग्रेस इस समय कई राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी के भीतर संगठनात्मक असंतोष और विभिन्न नेताओं के बीच मतभेदों की खबरें लगातार सामने आती रही हैं।
साथ ही, पार्टी के कुछ मामलों को लेकर न्यायिक प्रक्रियाएं भी चल रही हैं। ऐसे माहौल में चंद्रिमा भट्टाचार्य का संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटना पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व के अगले कदम पर है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के पद पर नए चेहरे की घोषणा करती है या चंद्रिमा भट्टाचार्य को मनाने की कोशिश करती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
वहीं, पार्टी की ओर से अभी तक इस इस्तीफे पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब पश्चिम बंगाल की राजनीति लगातार बदलते समीकरणों और संगठनात्मक पुनर्गठन के दौर से गुजर रही है। ऐसे में यह घटनाक्रम आने वाले समय में राज्य की राजनीति पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।




