नई दिल्ली, 8 अगस्त 2026 : भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट बेड़े को लेकर भारत की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रूस के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर फिलहाल भारत की दिलचस्पी कम होती दिख रही है। इसके बजाय स्वदेशी AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) और भविष्य की 6th Generation Fighter Jet Technology पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। रक्षा क्षेत्र से जुड़े हालिया घटनाक्रम के मुताबिक भारत फ्रांस के नेतृत्व वाले संभावित छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है। वहीं भारतीय वायुसेना के मौजूदा Su-30MKI बेड़े को अपग्रेड कर उसकी क्षमता बढ़ाने की योजना पर भी काम जारी है।
Su-57 को लेकर भारत ने क्यों बदला रुख ?
रूस की ओर से भारत को Su-57 के लिए कई आकर्षक प्रस्ताव दिए गए थे। इनमें स्थानीय उत्पादन, तकनीक तक व्यापक पहुंच और दो सीटों वाले संस्करण की पेशकश जैसी बातें शामिल थीं। इसके बावजूद भारत ने फिलहाल नए रूसी सुखोई वेरिएंट को प्राथमिकता नहीं देने का संकेत दिया है।भारत का फोकस अब Su-30MKI Super Sukhoi Upgrade, स्वदेशी AMCA और भविष्य की अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तकनीक पर है।
MiG-21 से Su-30MKI तक रूस रहा भारत का बड़ा साझेदार
भारतीय वायुसेना के इतिहास में रूसी लड़ाकू विमानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। 1960 के दशक में MiG-21 के उत्पादन के लिए भारत को तकनीकी सहयोग मिला। इसके बाद MiG-27 और Su-30MKI जैसे विमानों का उत्पादन और तकनीकी सहयोग आगे बढ़ा। Su-30MKI आज भी भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में शामिल है। HAL के जरिए भारत में बड़ी संख्या में Su-30MKI और इनके इंजन का उत्पादन किया गया है। ऐसे में Su-57 को लेकर मौजूदा रुख को रूस-भारत रक्षा संबंधों के पूरी तरह खत्म होने के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी।
अब AMCA पर भारत का बड़ा दांव
भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में स्वदेशी AMCA शामिल है। यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर प्रोग्राम है, जिसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना को अत्याधुनिक स्वदेशी लड़ाकू विमान उपलब्ध कराना है। AMCA के साथ भारत सेंसर, नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर, स्टील्थ, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों में अपनी क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
फ्रांस के साथ 6th-Gen Fighter पर क्यों नजर ?
भारत भविष्य की लड़ाकू विमान तकनीक में पीछे नहीं रहना चाहता। इसी वजह से फ्रांस के नेतृत्व वाले यूरोपीय छठी पीढ़ी के फाइटर प्रोग्राम में संभावित सहयोग को लेकर चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, फ्रांस और जर्मनी के बीच FCAS (Future Combat Air System) कार्यक्रम को लेकर मतभेद सामने आ चुके हैं। ऐसे में भारत के लिए किसी मौजूदा यूरोपीय कार्यक्रम में शामिल होने की राह आसान नहीं होगी। तकनीक हस्तांतरण, बौद्धिक संपदा अधिकार और विकास में भागीदारी जैसे मुद्दे अहम होंगे।
चीन की 5th-Gen क्षमता के बीच भारत की चुनौती
भारत की रणनीति के पीछे चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य विमान क्षमता भी एक अहम वजह है। चीन के पास J-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं और वह अगली पीढ़ी के युद्धक विमानों पर भी काम कर रहा है। ऐसे में भारत के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ AMCA को समय पर विकसित करना और दूसरी तरफ भविष्य की 6th-Gen Fighter Technology में अपनी जगह सुनिश्चित करना।
क्या रूस के साथ रक्षा साझेदारी खत्म हो रही है ?
Su-57 को लेकर भारत के मौजूदा रुख को रूस से पूरी तरह दूरी के संकेत के रूप में देखना सही नहीं होगा। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग सिर्फ लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। नौसेना, जहाज निर्माण, इंजन और अन्य रक्षा क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं अभी भी बनी हुई हैं। यानी तस्वीर यह है कि भारत रूस के पुराने रक्षा सहयोग को पूरी तरह छोड़ने के बजाय अपनी सैन्य जरूरतों के हिसाब से साझेदारियों में विविधता ला रहा है। आने वाले वर्षों में AMCA, Rafale और संभावित 6th-Gen Fighter Cooperation भारत की एयर पावर रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से बन सकते हैं।




