नई दिल्ली/इस्लामाबाद, 12 अगस्त 2026 : भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में तनाव लंबे समय से बना हुआ है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के संबंधों में और तल्खी आई है। इसी बीच पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तौकीर हुसैन ने भारत की पाकिस्तान नीति पर सवाल उठा दिए हैं। डॉन में प्रकाशित लेख में हुसैन ने दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव के लिए भारत की नीतिगत प्राथमिकताओं को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का पाकिस्तान के प्रति रुख पहले की तुलना में ज्यादा सख्त और आक्रामक है। हालांकि ये तौकीर हुसैन के विचार और विश्लेषण हैं, इन्हें भारत सरकार की आधिकारिक स्थिति नहीं माना जा सकता। मगर भारत को लेकर पाकिस्तानी मीडिया का भी रुख पहले से ज्यादा हमलावर और अपनी कमियों को छुपाने वाला रहा है।

भारत-पाकिस्तान बातचीत से क्या बदलेगा ?

तौकीर हुसैन ने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की संभावनाओं पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच लंबे समय से संवाद की कोशिशें होती रही हैं, लेकिन इससे रिश्तों में स्थायी सुधार नहीं आया। उन्होंने हाल ही में दोनों देशों के 117 एक्टिविस्ट और पूर्व अधिकारियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को लिखे गए खुले पत्र का भी जिक्र किया। इस पत्र में दोनों देशों के नेताओं से बातचीत दोबारा शुरू करने और रिश्तों को बेहतर बनाने की अपील भी की गई थी। हुसैन के मुताबिक, केवल बातचीत शुरू कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार दोनों देशों को अपनी नीतियों में भी बदलाव करना होगा।

मोदी सरकार की पाकिस्तान नीति पर क्या बोले तौकीर हुसैन ?

तौकीर हुसैन का कहना है कि पाकिस्तान को लेकर भारत का सख्त रुख प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल से पहले भी मौजूद था। हालांकि, उनके मुताबिक 2014 के बाद इसमें कुछ नए पहलू जुड़े हैं। उन्होंने आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा को भारत की पाकिस्तान नीति से जोड़ने का जिक्र करते हुए कहा कि इससे भारत में पाकिस्तान को लेकर नजरिया और सख्त हुआ है। तौकीर हुसैन ने पठानकोट हमले के बाद भारत की नीति का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि नई दिल्ली की ओर से इस्लामाबाद के साथ बातचीत से दूरी बनाने का उद्देश्य पाकिस्तान को कम महत्व देना है।

‘सिंधु जल संधि को हथियार बना रहा भारत’

भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा सिंधु जल संधि भी है। तौकीर हुसैन ने आरोप लगाया कि भारत ने पानी के मुद्दे को पाकिस्तान पर दबाव बनाने के एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया है। उन्होंने भारत के राजदूत के एक हालिया लेख का हवाला देते हुए कहा कि भारत सिंधु जल संधि को लेकर अपने रुख के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार मानता है। तौकीर हुसैन का तर्क है कि इस तरह की नीति दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने में कभी भी मदद नहीं करेगी। उन्होंने बातचीत और आपसी समझ बढ़ाने की जरूरत पर जोर देने की बात कही।

सिंधु जल संधि को लेकर भारत का क्या रुख है ?

सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे से जुड़ा महत्वपूर्ण समझौता है। भारत लगातार आतंकवाद और सीमा पार हिंसा के मुद्दे को पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों के केंद्र में रखता रहा है। ऐसे में पानी, आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई देते हैं। पाकिस्तान की ओर से भारत की जल नीति पर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं, जबकि भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्रारंभ से ही प्रमुखता देता है।

क्या भारत-पाकिस्तान में फिर शुरू हो सकती है बातचीत ?

दोनों देशों के बीच संवाद बहाली की मांग समय-समय पर उठती रही है। पूर्व अधिकारियों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों की अपील भी इसी दिशा में एक प्रयास है। मगर मौजूदा परिस्थितियों में आतंकवाद, सीमा सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दे दोनों देशों के बीच बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं। तौकीर हुसैन के विश्लेषण से साफ है कि पाकिस्तान में भारत की मौजूदा नीति को लेकर असंतोष है। वहीं, भारत की ओर से सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर सख्त रुख रिश्तों में किसी बड़े बदलाव की राह में सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।