नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026 : भारत की नजर अब सफेद सोना पर है। इसको लेकर भारत जल्द ही चिली के साथ एक समझौता कर सकता है। मालूम हो कि लिथियम को दुनिया में ‘सफेद सोना’ कहा जाता है और आने वाले समय में इसकी अहमियत और बढ़ने वाली है। इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक तकनीक के लिए लिथियम बेहद जरूरी है। ऐसे में भारत अब इस रणनीतिक खनिज की सप्लाई के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में भारत और चिली के बीच प्रस्तावित ट्रेड एग्रीमेंट बेहद अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अब अंतिम दौर में पहुंचने की खबर है। चिली दुनिया का प्रमुख कॉपर उत्पादक देश है और उसके पास लिथियम के बड़े भंडार भी मौजूद हैं।
'सफेद सोने' के खजाने तक होगी भारत की पहुंच
लिथियम इलेक्ट्रिक वाहनों और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों का प्रमुख हिस्सा है। भारत में EV और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलने के साथ लिथियम की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। फिलहाल वैश्विक लिथियम सप्लाई चेन में चीन की बड़ी भूमिका है। ऐसे में चिली के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध भारत को जरूरी खनिजों की वैकल्पिक सप्लाई हासिल करने में मदद कर सकते हैं।प्रस्तावित समझौते के तहत भारत की प्राथमिकताओं में लिथियम, कॉपर और दूसरे महत्वपूर्ण खनिजों तक बेहतर पहुंच शामिल है। इन खनिजों का इस्तेमाल इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग से लेकर क्लीन-एनर्जी सेक्टर तक में होता है।
कॉपर के मामले में भी चिली अहम
चिली दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर उत्पादक देश है। कॉपर का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, बिजली के उपकरण, पावर ग्रिड, इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर होता है। भारत में इलेक्ट्रिफिकेशन और मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने के साथ कॉपर की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में चिली के साथ लंबी अवधि का व्यापारिक संबंध भारत की सप्लाई चेन को मजबूत कर सकता है।
भारत-चिली CEPA से बढ़ सकता है कारोबार
भारत और चिली के बीच प्रस्तावित कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। व्यापार से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, जून तिमाही में भारत और चिली के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 74 फीसदी बढ़कर 2.06 अरब डॉलर पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 1.19 अरब डॉलर था। यह आंकड़ा बताता है कि दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं।
कब शुरू हुई थी CEPA पर बातचीत ?
भारत और चिली ने 8 मई 2025 को CEPA बातचीत के लिए नियम और शर्तें तय की थीं। इसके बाद मई 2025 के अंत में नई दिल्ली में बातचीत का पहला दौर शुरू हुआ। अब तक दोनों देशों के बीच बातचीत के चार दौर हो चुके हैं। अंतिम दौर 5 दिसंबर को नई दिल्ली में संपन्न हुआ था। दोनों देश अब समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
चीन पर भारत की निर्भरता घटाने की रणनीति
भारत के लिए यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसे क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। लिथियम और कॉपर जैसे खनिज इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी स्टोरेज, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और क्लीन एनर्जी जैसे भविष्य के उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अगर भारत को चिली से इन खनिजों की स्थिर और भरोसेमंद सप्लाई मिलती है, तो इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और EV बैटरी सेक्टर को फायदा हो सकता है। साथ ही किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
EV और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को होगा खूब फायदा
भारत तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में बैटरी के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। चिली के साथ व्यापारिक सहयोग मजबूत होने पर भारत को EV बैटरी, एनर्जी स्टोरेज, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी सेक्टर के लिए जरूरी कच्चे माल की सप्लाई में फायदा मिल सकता है। यही वजह है कि भारत-चिली ट्रेड डील को सिर्फ एक सामान्य व्यापार समझौते के बजाय भारत की भविष्य की क्रिटिकल मिनरल और मैन्युफैक्चरिंग रणनीति के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




