नई दिल्ली | 6 अगस्त 2026

संसद के मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संभावित संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। हालांकि मौजूदा लोकसभा गणित के अनुसार एनडीए अभी भी इस आंकड़े से पीछे दिखाई दे रहा है।

324 सांसदों के समर्थन का दावा, फिर भी बहुमत से दूर

मौजूदा आंकड़ों के अनुसार लोकसभा में एनडीए और उसके संभावित समर्थकों की संख्या करीब 324 सांसद मानी जा रही है। इसमें वे सांसद भी शामिल हैं जिन्होंने पहले सरकार के पक्ष में मतदान किया था, लेकिन औपचारिक रूप से एनडीए का हिस्सा नहीं हैं। वहीं संविधान संशोधन पारित कराने के लिए यदि लोकसभा के सभी 540 सांसद मतदान करते हैं, तो सरकार को कम से कम 360 वोटों की जरूरत होगी। इस हिसाब से एनडीए को अभी भी करीब 36 अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। अब देखना है कि एनडीए यह आंकड़ा कैसे पूरा करता है।

DMK का साथ मिलने पर भी नहीं बनेगा पूरा आंकड़ा

राजनीतिक समीकरणों के अनुसार अगर डीएमके के 22 सांसद सरकार के पक्ष में आते हैं, तो समर्थन का आंकड़ा बढ़कर करीब 346 तक पहुंच सकता है। लेकिन इसके बाद भी सरकार जरूरी दो-तिहाई बहुमत से पीछे रह जाएगी। यानी केवल डीएमके का समर्थन मिलने से विधेयक पारित कराना आसान नहीं होगा।

वॉकआउट की रणनीति से भी नहीं मिलेगी राहत

अगर कोई बड़ा विपक्षी दल मतदान से दूर रहता है या सदन से वॉकआउट करता है, तो बहुमत का आंकड़ा बदल सकता है। लेकिन मौजूदा गणित के अनुसार ऐसी स्थिति में भी सरकार के लिए राह आसान नहीं होगी। उदाहरण के तौर पर अगर डीएमके मतदान में हिस्सा नहीं लेती है और कुल मतदान करने वाले सांसदों की संख्या घटती है, तब भी एनडीए के पास मौजूद समर्थन संख्या पर्याप्त नहीं हो सकती। राज्यसभा में भी होगी असली परीक्षा

संविधान संशोधन विधेयक को सिर्फ लोकसभा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा में भी विशेष बहुमत की जरूरत होगी। ऐसे में सरकार को दोनों सदनों में राजनीतिक सहमति बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

अब नजरें संसद की रणनीति पर

महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े मुद्दों पर सरकार विपक्षी दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकती है। वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे पर अपनी रणनीति तय करेगा। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सरकार दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा कैसे हासिल करती है या फिर विधेयक को लेकर नया राजनीतिक समीकरण बनता है।