नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026 : संसद के मॉनसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में बयान की मांग पर अड़ा हुआ है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को लोकसभा में दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने हैं। इनमें केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने और नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NCDC) की फंडिंग शक्तियों का विस्तार करने से जुड़े बिल शामिल हैं। मॉनसून सत्र के अब कुछ ही दिन बाकी हैं। ऐसे में विपक्ष की मांग और सरकार के विधायी एजेंडे के बीच संसद में एक बार फिर हंगामे के आसार बने हुए हैं।
अमित शाह के बयान की मांग पर विपक्ष का दबाव
कांग्रेस समेत विपक्षी दल 20 जुलाई को संसद तक मार्च कर रहे छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठा रहे हैं। विपक्ष चाहता है कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में इस मामले पर अपना पक्ष रखें। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गृह मंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर संसद में जवाब दिया जाना चाहिए। विपक्ष ने 2023 में संसद सुरक्षा उल्लंघन के दौरान गृह मंत्री के बयान को लेकर हुए विवाद का हवाला दिया है। विपक्ष का कहना है कि संसद में सरकार को जवाब देना चाहिए। वहीं सरकार की ओर से विधायी कामकाज को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है।
आज लोकसभा में पेश होंगे दो अहम बिल
राजनीतिक गतिरोध के बीच सरकार सोमवार को लोकसभा में दो अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है। पहला है ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’, जबकि दूसरा ‘नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (संशोधन) विधेयक, 2026’ है। दोनों विधेयकों का संसद के मौजूदा सत्र के एजेंडे में महत्वपूर्ण स्थान है।
‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव
केरल के नाम में बदलाव से जुड़े विधेयक के जरिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन का प्रस्ताव है। इसके तहत राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ किए जाने की बात है। केरल विधानसभा पहले ही राज्य का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है। इसके बाद केंद्र सरकार ने भी इस प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी दी है। अब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इसे संसद के सामने रखा जा रहा है।
NCDC की फंडिंग शक्तियों में होगा विस्तार
दूसरे विधेयक का संबंध नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी NCDC से है। प्रस्तावित संशोधन के तहत NCDC की फंडिंग व्यवस्था का दायरा बढ़ाने की योजना है। मौजूदा व्यवस्था में NCDC मुख्य रूप से सहकारी समितियों से जुड़ी परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देता है। प्रस्तावित बदलाव के बाद सहकारी विकास से जुड़ी अन्य संस्थाओं को भी सीधे ऋण और अनुदान उपलब्ध कराने का रास्ता खुल सकता है। इसके अलावा केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ऐसी संस्थाओं में इक्विटी निवेश का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
सहकारी क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं को मिलेगा फायदा ?
सरकार का तर्क है कि देश में सहकारी क्षेत्र का दायरा लगातार बढ़ रहा है। तकनीक, बुनियादी ढांचे, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में कई संस्थाएं सहकारी क्षेत्र के विकास में योगदान दे रही हैं। ऐसे में NCDC की वित्तीय सहायता का दायरा बढ़ाने से इन संस्थाओं को भी सहकारी विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
फंड के इस्तेमाल पर निगरानी का भी प्रावधान
प्रस्तावित संशोधनों में फंडिंग और वित्तीय गतिविधियों की निगरानी से जुड़े प्रावधान भी हैं। NCDC को बैंकों और वित्तीय संस्थानों से क्रेडिट से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने और साझा करने का अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं होगा कि कोई भी संस्था स्वतः NCDC की फंडिंग के लिए पात्र हो जाएगी। संस्था का सहकारी विकास से जुड़ा होना जरूरी होगा। फंड के इस्तेमाल पर ऑडिट और रिपोर्टिंग जैसी व्यवस्थाएं भी लागू रहेंगी।
विपक्ष के रुख से बढ़ सकता है संसद में गतिरोध
एक तरफ सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग पर पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है। मॉनसून सत्र के अंतिम दिनों में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है या नहीं, यह महत्वपूर्ण होगा। अगर विपक्ष अपनी मांग पर कायम रहता है तो लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान एक बार फिर हंगामे की स्थिति बन सकती है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध का असर इन दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों की संसदीय प्रक्रिया पर कितना पड़ता है।




