नई दिल्ली | 20 जुलाई 2026

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार से हो गई। इसी दिन 'कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)' ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च का आह्वान किया। हालांकि दिल्ली प्रशासन ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी, लेकिन संगठन के समर्थक राजधानी में प्रदर्शन कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने संसद और आसपास के क्षेत्रों में कड़ी निगरानी और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है।

20 जुलाई की तारीख क्यों चुनी गई?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद का पहला दिन किसी भी विरोध प्रदर्शन के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है। इसी दिन सरकार अपने विधायी एजेंडे की शुरुआत करती है और पूरे देश का ध्यान संसद की कार्यवाही पर रहता है। ऐसे में CJP ने 20 जुलाई को मार्च का ऐलान कर शिक्षा, युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनाने की रणनीति अपनाई है। हालांकि संगठन ने आधिकारिक रूप से तारीख चुनने की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई है।

जंतर-मंतर पर कई प्रदर्शन, सुरक्षा व्यवस्था सख्त

मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर एक से अधिक संगठनों के प्रदर्शन प्रस्तावित रहे। इसी को देखते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 लागू कर दी है। संसद मार्ग, विजय चौक और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।

शिक्षा और युवाओं के मुद्दों को लेकर आंदोलन

CJP पिछले कई सप्ताह से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, छात्रों के भविष्य और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। संगठन का दावा है कि वह युवाओं की आवाज संसद तक पहुंचाना चाहता है। हाल के दिनों में इस आंदोलन को कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और सार्वजनिक हस्तियों का भी समर्थन मिला है।

आगे क्या?

फिलहाल दिल्ली पुलिस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। संसद सत्र के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है, जबकि CJP ने संकेत दिए हैं कि वह अपने मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने का प्रयास जारी रखेगी।