नई दिल्ली | 3 अगस्त 2026

भारत की अंतरिक्ष क्षमता को नई ऊंचाई देने वाले दो महत्वपूर्ण रणनीतिक उपग्रह NVS-03 और GISAT-1A लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दोनों सैटेलाइट पिछले कई सप्ताह से आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में अंतिम सरकारी मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। मंजूरी मिलते ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) इनका प्रक्षेपण करेगा। सूत्रों के अनुसार, दोनों उपग्रहों के साथ GSLV Mk-II रॉकेट भी लॉन्च के लिए तैयार है। हालांकि अंतिम स्वीकृति नहीं मिलने के कारण रॉकेट में प्रोपेलेंट भरने की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है।

NVS-03 क्यों है खास?

NVS-03 भारत की दूसरी पीढ़ी की NavIC (Navigation with Indian Constellation) प्रणाली का महत्वपूर्ण उपग्रह है। इसके लॉन्च के बाद भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली और अधिक सटीक तथा मजबूत होगी। इसका उपयोग नागरिक सेवाओं के साथ-साथ रक्षा, समुद्री सुरक्षा, विमानन, आपदा प्रबंधन और रणनीतिक अभियानों में भी किया जाएगा।

GISAT-1A देगा रियल-टाइम निगरानी की ताकत

GISAT-1A एक उन्नत जियो-इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे पृथ्वी की लगभग रियल-टाइम निगरानी के लिए विकसित किया गया है। यह उपग्रह सीमावर्ती क्षेत्रों, प्राकृतिक आपदाओं, कृषि, पर्यावरण और सुरक्षा गतिविधियों की लगातार निगरानी करने में सक्षम होगा। रणनीतिक दृष्टि से यह भारत की निगरानी क्षमता को और मजबूत करेगा।

लॉन्च में देरी क्यों?

सूत्रों के अनुसार, लॉन्च में देरी का प्रमुख कारण सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। इसके अलावा हाल के वर्षों में कुछ PSLV मिशनों में आई तकनीकी चुनौतियों के बाद ISRO अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। जनवरी 2026 में हुए PSLV-C62 मिशन में तीसरे चरण (PS3) में तकनीकी गड़बड़ी के कारण पेलोड को निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका था। इससे पहले मई 2025 में भी एक PSLV मिशन प्रभावित हुआ था। इन घटनाओं के बाद सभी आगामी मिशनों की समीक्षा और सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि GSLV और LVM रॉकेट PSLV के तीसरे चरण की तकनीक पर निर्भर नहीं हैं, इसलिए इन रणनीतिक मिशनों में तकनीकी जोखिम अलग प्रकृति के हैं।

भारत के लिए क्यों अहम हैं ये मिशन ?

NVS-03 और GISAT-1A केवल अंतरिक्ष मिशन नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट माने जा रहे हैं। एक ओर NVS-03 स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली को और सशक्त करेगा, वहीं GISAT-1A सीमाओं और महत्वपूर्ण क्षेत्रों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अब सभी की नजर सरकार की अंतिम मंजूरी पर है। स्वीकृति मिलते ही दोनों सैटेलाइट भारत की अंतरिक्ष और सुरक्षा क्षमताओं को नई मजबूती देने के लिए श्रीहरिकोटा से अंतरिक्ष की उड़ान भरेंगे।