बेंगलुरु, 3 अगस्त। कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार से पहले पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। मंत्री पद के बंटवारे को लेकर कई वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की नाराजगी अब बगावती तेवर में बदलती दिखाई दे रही है। इससे कांग्रेस नेतृत्व के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है।
मंत्री पद नहीं मिलने पर विधायक का इस्तीफा
मंत्री पद से वंचित रहने पर वरिष्ठ विधायक यशवंतराय पाटिल ने पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व ने उनकी लगातार उपेक्षा की है और यह केवल मंत्रिमंडल तक सीमित नहीं बल्कि संगठन की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है। सूत्रों के अनुसार, बेलूर के विधायक गोपालकृष्ण भी नेतृत्व से नाराज हैं और वे भी इस्तीफे पर विचार कर रहे हैं।
असंतुष्ट विधायकों की गुप्त बैठक
राजधानी बेंगलुरु के डॉलर्स कॉलोनी स्थित वरिष्ठ विधायक पीवी जयचंद्र के आवास पर एक दर्जन से अधिक असंतुष्ट विधायकों ने बंद कमरे में बैठक की। बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने भी हिस्सा लिया, जहां मंत्री पद के बंटवारे और पार्टी में बढ़ती नाराजगी पर चर्चा हुई। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि बैठक में आगे की रणनीति और नेतृत्व पर दबाव बनाने के विकल्पों पर भी विचार किया गया।
विभागों के बंटवारे पर भी नाराजगी
मंत्री पद से जुड़े विवाद के अलावा विभागों के आवंटन को लेकर भी असंतोष सामने आया है। वरिष्ठ नेता केएच मुनियप्पा को दिए गए मंत्रालय से असंतुष्टि जताई गई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व तक अपनी नाराजगी पहुंचाई है। वहीं, अंतिम समय में मंत्रिमंडल की सूची में बदलाव से भी कई नेताओं में असंतोष बढ़ा। कुछ संभावित नामों को सूची से हटाया गया, जबकि अन्य नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।
बीजेपी ने साधा निशाना
कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर भारतीय जनता पार्टी ने भी हमला बोला है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सामाजिक न्याय, युवाओं और महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के अपने दावों से समझौता किया है। पार्टी का कहना है कि नई कैबिनेट में कई वर्गों की अनदेखी की गई है, जिससे कांग्रेस के भीतर असंतोष बढ़ा है।
कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति
कैबिनेट विस्तार से ठीक पहले उभरी यह नाराजगी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा मानी जा रही है। यदि असंतुष्ट नेताओं को समय रहते संतुष्ट नहीं किया गया, तो इसका असर सरकार की कार्यशैली और संगठनात्मक एकजुटता दोनों पर पड़ सकता है। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व को असंतुष्ट नेताओं से बातचीत कर स्थिति संभालनी पड़ सकती है।




