नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के आंतरिक कामकाज में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि वह बार एसोसिएशन की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकती। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि यह मामला SCBA के आंतरिक मामलों से जुड़ा है, इसलिए याचिकाकर्ता अपनी शिकायत एससीबीए की चुनाव समिति के समक्ष ही रखें और वहीं उनकी बात सुनी जाएगी।
किस याचिका पर हुई सुनवाई ?
शीर्ष अदालत अधिवक्ता आशीष गोपाल गर्ग की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में मांग की गई थी कि चुनाव होने तक SCBA को कोई भी प्रस्ताव पारित करने से रोका जाए। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में SCBA द्वारा पारित प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए दायर की गई थी।
अदालत ने क्या कहा ?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बार एसोसिएशन एक लोकतांत्रिक संस्था है और उसके आंतरिक निर्णयों में न्यायालय हस्तक्षेप कतई नहीं कर सकता। यदि किसी सदस्य को शिकायत है तो वह एससीबीए की चुनाव समिति के समक्ष अपनी बात रख सकता है और वहीं उस पर बात हो सकती है।
क्या है पूरा मामला ?
16 जुलाई को SCBA ने एक प्रस्ताव पारित कर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अपना अनशन समाप्त करने की अपील की थी। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि सोनम वांगचुक ने शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए अपने स्वास्थ्य और जीवन को दांव पर लगाया है। इसी प्रस्ताव को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से साफ इनकार कर दिया और अपनी बात एससीबीए की चुनाव समिति के समक्ष रखने को कहा।




