नई दिल्ली | 12 जुलाई 2026
वास्तु शास्त्र में रसोईघर को केवल भोजन तैयार करने का स्थान नहीं, बल्कि घर की सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और पारिवारिक खुशहाली का प्रमुख केंद्र माना गया है। मान्यता है कि रसोई में की गई छोटी-छोटी गलतियां भी घर के वातावरण और आर्थिक स्थिति पर प्रभाव डाल सकती हैं। विशेष रूप से रोटी बनाते और परोसते समय कुछ बातों का ध्यान रखना शुभ माना जाता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार इन नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
गिनकर रोटियां बनाने से बचें
वास्तु शास्त्र में भोजन को माता अन्नपूर्णा का स्वरूप माना गया है। इसलिए रोटियां गिनकर बनाना शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा करने से राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है, जिससे घर में तनाव, अनावश्यक खर्च और मानसिक अशांति बढ़ने की संभावना रहती है।
पहली और आखिरी रोटी का विशेष महत्व
भारतीय परंपरा के अनुसार पहली रोटी गाय के लिए और आखिरी रोटी कुत्ते के लिए निकालने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि पहली रोटी गाय को खिलाने से देवी अन्नपूर्णा और भगवान की कृपा प्राप्त होती है, जबकि अंतिम रोटी कुत्ते को खिलाने से राहु, केतु और शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
बासी आटे का उपयोग न करें
वास्तु शास्त्र में ताजा आटे से बनी रोटियों को शुभ माना गया है। रात का बचा हुआ आटा बार-बार उपयोग करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने और पारिवारिक कलह की संभावना बताई जाती है। इसलिए संभव हो तो हर दिन ताजा आटा गूंथकर ही रोटियां बनानी चाहिए।
रोटी सम्मानपूर्वक परोसें
वास्तु मान्यताओं के अनुसार किसी व्यक्ति के हाथ में सीधे रोटी देने के बजाय उसे थाली, प्लेट या रोटीदान में रखकर परोसना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से परिवार में प्रेम, सम्मान और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। हालांकि, ये सभी मान्यताएं धार्मिक और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं तथा इनका कोई सार्वभौमिक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।




