नई दिल्ली | 11 जुलाई 2026
सावन से पहले आने वाला जुलाई माह का पहला प्रदोष व्रत इस वर्ष 12 जुलाई 2026, रविवार को रखा जाएगा। रविवार के दिन पड़ने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और अनजाने में हुए पापों से भी मुक्ति मिलती है।
जानें कब है रवि प्रदोष व्रत
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पंचांग के मुताबिक त्रयोदशी तिथि का आरंभ 11 जुलाई की रात्रि 2:05 बजे होगा और 12 जुलाई की रात 10:31 बजे इसका समापन होगा। चूंकि प्रदोष काल के दौरान त्रयोदशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए 12 जुलाई को ही रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना को अत्यंत फलदायी माना जाता है।
रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि
रवि प्रदोष व्रत के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें। शाम के प्रदोष काल में भगवान शिव के मंदिर जाकर शिवलिंग का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, चंदन, अक्षत, शहद, पुष्प और माला अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें, शिव चालीसा और आरती करें तथा भोग अर्पित कर पूजा संपन्न करें। पूजा के बाद श्रद्धा अनुसार व्रत का पारण किया जाता है।
क्या है धार्मिक महत्व?
शिव पुराण में प्रदोष व्रत को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में विराजमान रहते हैं और भक्तों की प्रार्थना शीघ्र स्वीकार करते हैं। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया रवि प्रदोष व्रत जीवन की बाधाओं को दूर करता है, स्वास्थ्य, समृद्धि और वैवाहिक सुख प्रदान करता है तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।




