पटना | 5 जुलाई 2026

बिहार की राजनीति में वर्षों तक राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और लालू परिवार की पहचान रहे पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने आखिरकार खाली कर दिया है। करीब दो दशक तक यह बंगला बिहार की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा। बंगला खाली होने के बाद अब सरकारी आवास में उपलब्ध सामान की सूची को लेकर नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।

राबड़ी देवी ने आवास खाली करने के साथ ही भवन निर्माण विभाग को पत्र लिखकर सरकारी आवास में उपलब्ध कराए गए सभी फर्नीचर, उपकरण और अन्य सरकारी सामान की आधिकारिक सूची उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि विभाग की ओर से सामान की सूची मिलने के बाद उसका सही मिलान किया जा सकेगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद या गलतफहमी उत्पन्न न हो।

हालांकि, राष्ट्रीय जनता दल का आरोप है कि विभाग की ओर से अब तक इस पत्र का कोई जवाब नहीं दिया गया है। इसे लेकर पार्टी ने सरकार पर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले को राजनीतिक दुर्भावना से जोड़कर देखा है।

राजद ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने दावा किया कि राबड़ी देवी और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए सरकारी आवास खाली कर दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से अब तक इस बंगले में सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए सामान की जानकारी मांगने के लिए विभाग को पत्र भेजा गया, लेकिन अब तक कोई सूची उपलब्ध नहीं कराई गई।

मंडल ने कहा कि यदि सरकार के पास सामान का रिकॉर्ड ही नहीं है तो भविष्य में किसी भी प्रकार के आरोप लग सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इस मामले को लंबित रख रही है।

'लालू परिवार को बनाया जा रहा निशाना'

राजद ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। मंगनी लाल मंडल ने आरोप लगाया कि पटना में कई ऐसे नेता हैं, जिनके पास एक से अधिक सरकारी आवास हैं या ऐसे बंगले आवंटित हैं जो उनके नाम पर अधिकृत नहीं हैं। इसके बावजूद सरकार ने केवल लालू परिवार के मामले में सख्ती दिखाई।

उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने की मंशा से की गई है। राजद का आरोप है कि सरकार दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के साथ अलग व्यवहार कर रही है।

सरकारी सामान की सूची क्यों बनी विवाद की वजह?

राबड़ी देवी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि उन्हें सरकारी आवास का चार्ज रजिस्टर और विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी सरकारी सामान की सूची उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि सूची मिलने के बाद प्रत्येक वस्तु का मिलान कर विभाग को विधिवत सौंप दिया जाएगा।

राजद नेताओं का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है ताकि बाद में यह आरोप न लगाया जा सके कि सरकारी सामान गायब है या उसे निजी उपयोग के लिए ले जाया गया है।

अब किसे मिला 10 सर्कुलर रोड का बंगला?

सूत्रों के अनुसार, 10 सर्कुलर रोड स्थित यह सरकारी आवास अब एनडीए सरकार के मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया गया है। वहीं, राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव फिलहाल नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सरकारी आवास में शिफ्ट हो रहे हैं।

करीब बीस वर्षों तक बिहार की राजनीति का अहम केंद्र रहे इस बंगले के खाली होने को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। हालांकि, सरकारी सामान की सूची को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया मुद्दा बन गया है।

सरकार की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है।