नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026 : लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन को लेकर सियासी बहस तेज होती जा रही है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद पी. चिदंबरम ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को फ्रीज कर देना चाहिए। चिदंबरम ने चेतावनी दी है कि अगर सीटों की संख्या काफी बढ़ाई गई तो लोकसभा की मौजूदा प्रकृति प्रभावित हो सकती है।चिदंबरम ने यह भी कहा कि जिन राज्यों ने परिवार नियोजन को प्रभावी तरीके से लागू किया है, उनके प्रतिनिधित्व को कम नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दक्षिण भारतीय राज्यों के मौजूदा हिस्से को सुरक्षित रखने की भी मांग की। इसके साथ ही लोकसभा की सीटों को फ्रीज करने की वकालत की।

‘543 सीटों पर फ्रीज हो लोकसभा’

पी. चिदंबरम ने परिसीमन विधेयक की जरूरत पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्यों के मौजूदा प्रतिनिधित्व को कम करने का कोई आधार नहीं होना चाहिए। उनका तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने वाले राज्यों को इसके लिए राजनीतिक रूप से नुकसान नहीं उठाना चाहिए।उन्होंने कहा कि लोकसभा को 543 सीटों पर फ्रीज किया जाना चाहिए। चिदंबरम ने सीटों की संख्या बहुत अधिक बढ़ने की स्थिति की तुलना चीन की संसद से भी की।

दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर क्या बोले चिदंबरम ?

चिदंबरम ने खास तौर पर दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की मौजूदा हिस्सेदारी करीब 7.18 फीसदी है और इसे हर हाल में सुरक्षित रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक तमिलनाडु समेत अन्य दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को भी फ्रीज किया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता चिदंबरम का सवाल है कि जिन राज्यों ने परिवार नियोजन के लक्ष्य को गंभीरता से लागू किया, उन्हें परिसीमन के दौरान इसका नुकसान क्यों उठाना पड़े ?

परिसीमन पर क्यों बढ़ा सियासी विवाद ?

परिसीमन के मुद्दे को लेकर केंद्र और विपक्षी दलों के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद सामने आते रहे हैं। खासकर दक्षिणी राज्यों की ओर से आशंका जताई जाती रही है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण होने पर उनका लोकसभा में मौजूदा प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से परिसीमन का मुद्दा केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संघीय संतुलन से भी जुड़ा हुआ है।

झारखंड छात्र आंदोलन पर भी बोले चिदंबरम

चिदंबरम ने झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की निंदा की है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन भी जारी है। प्रदर्शनकारी लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।