नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026 : विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA संशोधन विधेयक को लेकर बुधवार को लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ने बिल को 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव सदन में पेश कर दिया, जिसे हंगामे के बीच मंजूरी मिल गई। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। यह समिति अपनी रिपोर्ट आगामी शीतकालीन सत्र में सदन के सामने रखेगी।

FCRA Bill पर लोकसभा में घमासान, विपक्ष ने उठाए सवाल

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने FCRA संशोधन विधेयक को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव रखा। बिल को लेकर विपक्षी सांसदों ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने दावा किया कि पूरा विपक्ष इस विधेयक के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून का असर अल्पसंख्यकों और सामाजिक संगठनों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इससे देश की एकता को भी खतरा हो सकता है।

अखिलेश बोले- ‘सरकार बताए, बिल क्यों लाना चाहती है?’

अखिलेश यादव ने सरकार से FCRA में संशोधन की जरूरत और इसके उद्देश्य को स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस कानून का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर सकती है और इससे अल्पसंख्यकों को दबाने की आशंका है। अखिलेश ने लोकतंत्र को मजबूत करने और आम लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर जोर देते हुए सरकार की दूसरी नीतियों पर भी निशाना साधा।

रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को किया खारिज

विपक्ष के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि FCRA संशोधन विधेयक अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए सरकार का पक्ष रखा। हालांकि, सदन में विरोध और नारेबाजी जारी रही। हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी करनी पड़ी।

31 सदस्यों की JPC करेगी FCRA Bill की जांच

सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक FCRA संशोधन विधेयक की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति में कुल 31 सदस्य होंगे। लोकसभा से 21 सदस्य , राज्यसभा से 10 सदस्य , समिति अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में पेश करेगी। JPC में भेजे जाने के बाद अब विधेयक के प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा और जांच का रास्ता खुल गया है।

कांग्रेस ने भी JPC में भेजने की मांग का किया समर्थन

FCRA बिल को लेकर विपक्ष के भीतर भी अलग-अलग स्तर पर चर्चा देखने को मिली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विधेयक को JPC के पास भेजे जाने की मांग का समर्थन किया। विपक्ष का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण कानून में बदलाव से पहले इसके प्रावधानों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। सरकार की ओर से बिल को लेकर अपनी दलीलें रखी गई हैं।

डिंपल यादव ने भी जताई चिंता

समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने भी बिल को JPC के पास भेजे जाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर विधेयक को समिति के पास भेजा जा रहा है तो यह बेहतर प्रक्रिया है, क्योंकि विपक्ष पहले ही इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जता चुका है। डिंपल यादव ने NGO और शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए।

FCRA कानून आखिर है क्या?

FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act विदेशी स्रोतों से मिलने वाले अंशदान और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाला कानून है। इसके तहत पात्र संस्थाओं और संगठनों को विदेशी चंदा प्राप्त करने और उसका इस्तेमाल करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होता है। प्रस्तावित संशोधनों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद सामने आए हैं। अब JPC में विधेयक के प्रावधानों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

अब JPC की रिपोर्ट पर टिकी नजर

लोकसभा में JPC को भेजने का प्रस्ताव पास होने के बाद FCRA संशोधन विधेयक की अगली अहम प्रक्रिया संयुक्त संसदीय समिति में होगी। समिति विभिन्न पक्षों और प्रावधानों पर विचार करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। अब नजर इस बात पर होगी कि JPC अपनी रिपोर्ट में विधेयक को लेकर क्या सुझाव देती है और सरकार उन सिफारिशों को किस तरह आगे बढ़ाती है।