मुंबई | 1 अगस्त

मुंबई में साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नवी मुंबई के नेरुल निवासी 90 वर्षीय बुजुर्ग को साइबर ठगों ने करीब सात महीने तक कथित "डिजिटल अरेस्ट" में रखकर 1.57 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का पता तब चला, जब उन्होंने अखबार में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी एक खबर पढ़ी।

सरकारी अधिकारी बनकर बनाया निशाना

पुलिस के अनुसार, ठगी की घटना 12 जनवरी से 30 जुलाई के बीच हुई। आरोपियों ने खुद को दूरसंचार विभाग और मुंबई पुलिस का वरिष्ठ अधिकारी बताकर बुजुर्ग से संपर्क किया। गिरोह के सदस्यों ने अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करते हुए दावा किया कि उनका नाम अवैध वित्तीय लेन-देन के मामले में सामने आया है और उनके बैंक खातों की जांच चल रही है।

विश्वास दिलाने के लिए कथित तौर पर फर्जी सरकारी नोटिस और एक नकली सरकारी वेबसाइट भी दिखाई गई। इसके बाद बुजुर्ग दंपती को निर्देश दिया गया कि वे घर से बाहर न निकलें और किसी को भी इस जांच के बारे में जानकारी न दें।

मानसिक दबाव में ट्रांसफर कर दिए करोड़ों रुपये

आरोपियों ने व्हाट्सएप कॉल और वीडियो कॉल के जरिए लगातार संपर्क बनाए रखा और मानसिक दबाव बनाकर पीड़ित से उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) तक तुड़वा दी। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.57 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।

अखबार की खबर से खुली ठगी की पोल

करीब सात महीने बाद बुजुर्ग ने अखबार में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी साइबर ठगी की खबर पढ़ी। खबर में बताए गए तरीकों और अपने अनुभव में समानता देखकर उन्हें एहसास हुआ कि वे किसी सरकारी जांच का हिस्सा नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों के जाल में फंस गए थे। इसके बाद उन्होंने नवी मुंबई साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने शुरू की जांच

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जिन बैंक खातों में रकम भेजी गई है, उनके लेन-देन की जांच की जा रही है। साइबर पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के प्रयास जारी हैं।