नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026

संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को भी NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक घमासान जारी रहा। विपक्ष ने एक बार फिर केंद्र सरकार को घेरते हुए संसद में इस मुद्दे पर चर्चा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की जांच की मांग उठाई। वहीं सरकार ने स्पष्ट किया कि वह संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है।

सरकार बोली- मामले में निष्पक्ष जांच जारी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, जैसे ही NEET पेपर लीक का मामला सामने आया, केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए सुधारात्मक कदम उठाए और जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। सूत्रों का दावा है कि अब तक 13 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच लगातार जारी है।

पीएम मोदी ने कहा- पेपर लीक 'घोर पाप'

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NEET पेपर लीक को "घोर पाप" बताते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एनडीए सांसदों से कहा कि छात्रों का विश्वास बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर सभी राज्य सरकारों तथा केंद्र को मिलकर काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि छात्रों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए।

राहुल गांधी ने उठाईं पांच प्रमुख मांगें

विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि संसद में इस पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने छात्रों पर कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई, दर्ज मामलों की वापसी और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग भी रखी।

संसद में जारी है गतिरोध

NEET विवाद को लेकर संसद के दोनों सदनों में लगातार दूसरे दिन भी हंगामे की स्थिति बनी रही। विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया, जबकि सरकार का कहना है कि वह किसी भी चर्चा से पीछे नहीं हट रही है और दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। अब सभी की नजर संसद में संभावित चर्चा और आगे की राजनीतिक रणनीति पर टिकी हुई है।