नई दिल्ली | 6 अगस्त 2026

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि न्यायिक अधिकारी सरकारी कर्मचारी नहीं होते, बल्कि वे एक अलग और विशिष्ट श्रेणी (Distinct Class) के अधिकारी हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उनकी नियुक्ति भले ही राज्य सरकारों द्वारा की जाती हो, लेकिन उनकी संवैधानिक भूमिका उन्हें सामान्य सरकारी कर्मचारियों से अलग बनाती है। यह टिप्पणी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने के प्रस्ताव पर सुनवाई के दौरान की।

राज्यों की दलील पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान कुछ राज्य सरकारों ने दलील दी कि यदि न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाई जाती है, जबकि राज्य के अन्य कर्मचारी पहले सेवानिवृत्त होते हैं, तो इससे असमानता का सवाल खड़ा हो सकता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की तुलना सामान्य सरकारी कर्मचारियों से नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि वे एक अलग संवैधानिक श्रेणी का हिस्सा हैं, इसलिए उनके लिए अलग सेवा शर्तें और सेवानिवृत्ति आयु निर्धारित की जा सकती है।

'अनुभव न्यायपालिका की सबसे बड़ी पूंजी'

पीठ ने यह भी कहा कि न्यायिक व्यवस्था में अनुभव का विशेष महत्व होता है। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में कई पेशों, जैसे प्रोफेसरों और डॉक्टरों, के लिए भी अलग-अलग सेवानिवृत्ति आयु निर्धारित है। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों के लिए अलग व्यवस्था होना असामान्य नहीं है।

वित्तीय बोझ की दलील भी खारिज

राज्य सरकारों ने यह भी तर्क दिया कि सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि किसी अधिकारी के सेवानिवृत्त होने पर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ देने पड़ते हैं, साथ ही नए अधिकारी की नियुक्ति और प्रशिक्षण पर भी खर्च होता है। ऐसे में अनुभवी न्यायिक अधिकारी को सेवा में बनाए रखना कई मामलों में अधिक व्यावहारिक हो सकता है।

पहले भी दिए थे निर्देश

गौरतलब है कि 22 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्टों से न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के मुद्दे पर समयबद्ध निर्णय लेने को कहा था। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जहां राज्य सरकार और संबंधित हाई कोर्ट सहमत हों, वहां अंतरिम व्यवस्था के तहत बढ़ी हुई सेवानिवृत्ति आयु लागू की जा सकती है।