पटना | 17 जुलाई 2026

बिहार के सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। वर्ष 2024 में पूर्णिया के तत्कालीन जिलाधिकारी IAS कुंदन कुमार द्वारा शुरू किया गया 'पूर्णिया लाइव क्लासेस' मॉडल अब पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पहल की सफलता को देखते हुए इसे राज्यव्यापी रूप देने के निर्देश दिए हैं। अब यह योजना 'बिहार लाइव क्लासेस' के नाम से संचालित होगी, जिससे लाखों विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा।

मुंबई की नौकरी छोड़ चुनी सिविल सेवा की राह

IAS कुंदन कुमार का सफर युवाओं के लिए प्रेरणा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मुंबई की एक प्रतिष्ठित निजी कंपनी में करीब पांच वर्षों तक नौकरी की। बेहतर वेतन और सुरक्षित करियर के बावजूद उन्होंने सिविल सेवा में जाकर समाज के लिए काम करने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी शुरू की।

पहले IPS बने, फिर दोबारा परीक्षा देकर बने IAS

कुंदन कुमार ने वर्ष 2009 में पहली बार UPSC परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में स्थान हासिल किया। हालांकि उनका लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) था। उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और वर्ष 2012 में IAS बनकर अपना सपना पूरा किया। इसके बाद बिहार के विभिन्न जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालते हुए कई नवाचार किए।

दो बार प्रधानमंत्री से मिल चुका सम्मान

बेहतर प्रशासनिक कार्यों और नवाचारों के लिए IAS कुंदन कुमार को दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें डिजिटल शिक्षा और कृषि क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

क्या है 'पूर्णिया लाइव क्लासेस' मॉडल?

इस मॉडल के तहत सरकारी स्कूलों के छात्रों को लाइव ऑनलाइन क्लास, रिकॉर्डेड लेक्चर, डाउट क्लियरिंग सेशन और नियमित साप्ताहिक टेस्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। बाद में इसमें NEET और IIT-JEE की तैयारी भी शामिल कर दी गई। वर्तमान में पूर्णिया जिले के 265 सरकारी स्कूल इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं और हजारों छात्र इसका लाभ उठा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने देखा लाइव डेमो, 15 अगस्त तक लागू करने का निर्देश

वर्तमान में पटना के जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत IAS कुंदन कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी को इस मॉडल का लाइव डेमो दिखाया। पूर्णिया जिला स्कूल से लाइव क्लास का प्रदर्शन किया गया, जिसमें वर्तमान डीएम अंशुल कुमार भी मौजूद रहे। प्रस्तुति से प्रभावित मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को 15 अगस्त 2026 तक पूरे बिहार में इस मॉडल को लागू करने के निर्देश दिए।

लाखों छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ

सरकार का मानना है कि 'बिहार लाइव क्लासेस' के लागू होने से दूर-दराज के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन मिलेगा। डिजिटल माध्यम से पढ़ाई, रिकॉर्डेड लेक्चर, टेस्ट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसी सुविधाएं राज्य के लाखों छात्रों तक पहुंचेंगी, जिससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।