नई दिल्ली/मॉस्को, 8 अगस्त 2026: अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव के बीच भारत व रूस अपनी दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी को नए दौर के लिए ढालने की कोशिश कर रहे हैं। नई रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश बदलती वैश्विक राजनीति, आर्थिक अनिश्चितताओं और सुरक्षा चुनौतियों के बीच अपने रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में भारत-रूस संबंधों को लंबे समय से कायम एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी बताया गया है। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष, कृषि, निवेश और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है।

अमेरिका के दबाव के बीच भारत-रूस की दोस्ती का नया दौर

रिपोर्ट के मुताबिक भारत व रूस अपने रिश्तों को केवल पारंपरिक रक्षा सहयोग तक सीमित रखने के बजाय व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। यूरेशिया में बदलते शक्ति संतुलन और वैश्विक व्यवस्था में आ रहे बदलावों के बीच दोनों देशों के लिए यह साझेदारी और अहम हो गई है। भारत की विदेश नीति में रणनीतिक स्वायत्तता को प्रमुखता मिलने के कारण नई दिल्ली रूस के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ भी संतुलन साध रही है।

मोदी-पुतिन की बैठक बनी रिश्तों का अहम आधार

रिपोर्ट में 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई वार्षिक शिखर बैठक को दोनों देशों के संस्थागत संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया है। इस दौरान रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, निवेश, जलवायु परिवर्तन, ध्रुवीय अनुसंधान, अंतरिक्ष, कृषि और तकनीक समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों और सहयोग प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।

रक्षा क्षेत्र में भारत-रूस सहयोग सबसे मजबूत

भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी में रक्षा सहयोग की भूमिका सबसे अहम रही है। रिपोर्ट में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, नौसैनिक प्लेटफॉर्म और हेलीकॉप्टर निर्माण जैसे प्रस्तावों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा भारत में रूसी तकनीक के आधार पर Su-30MKI लड़ाकू विमानों और T-90 टैंकों का लाइसेंस प्राप्त उत्पादन दोनों देशों के लंबे रक्षा सहयोग का उदाहरण है।

ब्रह्मोस से लेकर INS विक्रमादित्य तक

भारत-रूस रक्षा साझेदारी के प्रमुख उदाहरणों में ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम, लड़ाकू विमान के संयुक्त डिजाइन एवं विकास और भारत में रूसी मूल के सैन्य प्लेटफॉर्म का उत्पादन शामिल है।भारतीय नौसेना में रूस निर्मित विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य का शामिल होना भी दोनों देशों के रक्षा सहयोग की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।

अब रक्षा से आगे बढ़ रही साझेदारी

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और रूस के रिश्ते अब सिर्फ हथियारों और सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं रह गए हैं। ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार, निवेश, कृषि, स्मार्ट सिटी, नवाचार और ध्रुवीय अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत और रूस की कोशिश ऐसी बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा देने की है, जिसमें देशों की संप्रभुता और रणनीतिक हितों को महत्व मिले। यही वजह है कि दशकों पुरानी भारत-रूस दोस्ती अब नए क्षेत्रों और नई रणनीतिक प्राथमिकताओं के साथ आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।