नई दिल्ली/तेल अवीव : सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते के बाद पश्चिम एशिया की बदलती रणनीतिक तस्वीर पर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच इजरायली भू-राजनीतिक विश्लेषक हर्ब कीनोन ने अनुमान जताया है कि इस घटनाक्रम का असर भारत और इजरायल के संबंधों पर भी पड़ सकता है और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हो सकती है। इजरायली अखबार द जेरूसलम पोस्ट के विश्लेषक हर्ब कीनोन के मुताबिक, मक्का समझौते के बाद भारत और इजरायल के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की नई परिस्थितियां बन सकती हैं। उनका आकलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हालिया बातचीत को भी इसी क्षेत्रीय घटनाक्रम से जोड़कर देखता है। अब माना जा रहा है कि मक्का पैक्ट के बाद भारत और इजरायल के बीच दोस्ती और मजबूत होगी।

मक्का समझौते से पहले मोदी-नेतन्याहू की फोन पर बातचीत

मक्का रक्षा समझौते की घोषणा से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा था कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। मोदी ने यह भी बताया था कि बातचीत के दौरान भारत-इजरायल स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के विभिन्न पहलुओं में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को लगातार मजबूत होने वाला बताया था। कीनोन का मानना है कि अगले दिन सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच रक्षा समझौते की घोषणा के बाद उस बातचीत का क्षेत्रीय संदर्भ और महत्वपूर्ण हो जाता है।

क्या है मक्का रक्षा समझौता ?

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुआ समझौता तीनों देशों के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। समझौते को मक्का पैक्ट के नाम से भी जाना जा रहा है, क्योंकि इसे मक्का में अंतिम रूप दिया गया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, समझौते में सामूहिक रक्षा से जुड़ा प्रावधान शामिल है। इसके तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। यह व्यवस्था NATO के चर्चित Article 5 की अवधारणा से तुलना का कारण बनी है, हालांकि दोनों व्यवस्थाओं की अपनी अलग संरचना और कानूनी प्रकृति है।

भारत-इजरायल रिश्तों पर क्यों पड़ सकता है असर ?

हर्ब कीनोन के विश्लेषण के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बदलते सुरक्षा समीकरण भारत और इजरायल को अपने रणनीतिक सहयोग को और विस्तार देने की दिशा में प्रेरित कर सकते हैं। उनके अनुसार, अमेरिका लंबे समय से पश्चिम एशिया में एक व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे की दिशा में प्रयास करता रहा है, जिसमें इजरायल और प्रमुख अरब देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिश शामिल रही है। ऐसे में मक्का समझौते के बाद क्षेत्रीय समीकरण में आए बदलाव नई रणनीतिक व्यवस्थाओं को जन्म दे सकते हैं। कीनोन का आकलन है कि बदलती परिस्थितियों के बीच भारत और इजरायल अपनी सुरक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग से जुड़े संबंधों को और आगे बढ़ा सकते हैं।

भारत-इजरायल की रणनीतिक साझेदारी पहले से मजबूत

भारत और इजरायल के संबंध पिछले वर्षों में रक्षा, सुरक्षा, कृषि, तकनीक और नवाचार सहित कई क्षेत्रों में आगे बढ़े हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। पीएम मोदी व नेतन्याहू के बीच लगातार उच्चस्तरीय संपर्क भी दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों की अहमियत को दर्शाता है। हालांकि मक्का समझौते के बाद भारत-इजरायल संबंधों में किस स्तर तक बदलाव आएगा। यह आने वाले समय में क्षेत्रीय घटनाक्रम और दोनों देशों के नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगा।

पश्चिम एशिया में बदल रहा सुरक्षा समीकरण

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच रक्षा समझौते ने पश्चिम एशिया और उसके आसपास के रणनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। क्षेत्रीय देशों के बीच बढ़ता सुरक्षा सहयोग भविष्य में कई नई साझेदारियों और व्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में इजरायली विशेषज्ञ की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है कि मक्का समझौते के बाद भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक सहयोग को और गति मिल सकती है। हालांकि, इसे फिलहाल एक विशेषज्ञ का आकलन माना जाना चाहिए, न कि भारत या इजरायल सरकार की आधिकारिक घोषणा।