नई दिल्ली, | 5 अगस्त 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो हटाए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta पर सख्त रुख अपनाया है। भाजपा सांसद और संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के सदस्य निशिकांत दुबे ने Meta प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से तीन दिनों के भीतर माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर कंपनी को मिलने वाली Safe Harbour सुरक्षा वापस लेने पर विचार किया जा सकता है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो हटाना केवल एक तकनीकी गलती का मामला नहीं है, बल्कि प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय को भी अवगत कराया गया है।
Meta से मांगा गया जवाब
संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने Meta के अधिकारियों से वीडियो हटाए जाने के कारणों पर जवाब मांगा था। बैठक के दौरान Meta ने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो गलती से हट गया था और इसके लिए कंपनी ने खेद भी जताया। हालांकि समिति के कुछ सदस्यों का कहना है कि केवल माफी से मामला खत्म नहीं होगा और इस तरह की घटनाओं में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
क्या है Safe Harbour सुरक्षा ?
Safe Harbour एक कानूनी प्रावधान है, जिसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए सीमित कानूनी सुरक्षा मिलती है। हालांकि कंपनियों को तय नियमों और जिम्मेदारियों का पालन करना होता है। भाजपा सासंद निशिकांत दुबे ने कहा कि अगर कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से नहीं निभाता है तो भारत सरकार इस सुरक्षा की समीक्षा कर सकती है।
कैसे शुरू हुआ विवाद ?
यह पूरा विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक फेसबुक वीडियो से जुड़ा है। यह वीडियो पहले इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया था और बाद में फेसबुक पर साझा किया गया। कुछ समय के लिए यह वीडियो फेसबुक से हट गया था, जिसके बाद राजनीतिक और सरकारी स्तर पर सवाल उठाए गए। बढ़ते विवाद के बाद Meta ने वीडियो को दोबारा बहाल कर दिया था। कंपनी की ओर से इसे तकनीकी गलती बताया गया।
सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही पर बहस तेज
इस मामले के बाद भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और कानूनी जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज हो गई है। इस मामले के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि Meta इस अल्टीमेटम पर क्या कदम उठाता है।




