नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026 : भारतीय नौसेना ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में बढ़ते समुद्री खतरे के बीच अपने समुद्री हितों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। भारतीय नौसेना ने 9 और 10 अगस्त को दो क्रूड ऑयल टैंकरों MT Compass और MT Thalatta को बाब-अल-मंदेब के संवेदनशील समुद्री क्षेत्र से सुरक्षित निकालने के लिए एस्कॉर्ट किया। इस ऑपरेशन में नौसेना के युद्धपोत INS Trishul और INS Aditya शामिल रहे। इस क्षेत्र में हूती हमलों के बढ़ते खतरे और हाल में भारतीय ध्वज वाले एक जहाज को निशाना बनाए जाने के बाद यह कार्रवाई समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
लाल सागर में क्यों बढ़ा खतरा ?
यमन के आसपास का समुद्री क्षेत्र पिछले कुछ समय से जहाजों के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। हूती विद्रोहियों की ओर से लाल सागर और आसपास के समुद्री रास्तों में जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है। इसकी रणनीतिक स्थिति के कारण यह वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा जोखिम बढ़ने का सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
INS त्रिशूल और INS आदित्य ने संभाला मोर्चा
भारतीय नौसेना ने हाई-रिस्क समुद्री क्षेत्र में दो तेल टैंकरों को सुरक्षा प्रदान की। INS Trishul और INS Aditya ने MT Compass और MT Thalatta को एस्कॉर्ट करते हुए उन्हें संवेदनशील क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। नौसेना की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब लाल सागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है।
भारतीय जहाज पर हमले के बाद बढ़ी चिंता
हाल ही में यमन के पास एक भारतीय ध्वज वाले जहाज पर हमला हुआ था। इस घटना के बाद समुद्री मार्ग से होने वाले भारतीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी। हमले के बाद भारतीय नौसेना की सक्रियता को इसी व्यापक समुद्री सुरक्षा चुनौती के संदर्भ में देखा जा रहा है। भारत के लिए तेल और अन्य सामान की आपूर्ति के लिहाज से समुद्री रास्ते बेहद महत्वपूर्ण हैं।
बाब-अल-मंदेब क्यों है इतना अहम ?
बाब-अल-मंदेब दुनिया के प्रमुख समुद्री चोकपॉइंट्स में शामिल है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। यूरोप, एशिया और मध्य-पूर्व के बीच समुद्री व्यापार के लिए यह एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने पर जहाजों को वैकल्पिक लंबे समुद्री रास्ते अपनाने पड़ सकते हैं, जिससे परिवहन लागत और यात्रा का समय दोनों बढ़ सकते हैं।
भारत के लिए नौसेना का ऑपरेशन क्यों महत्वपूर्ण ?
लाल सागर में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के बीच भारतीय नौसेना का एस्कॉर्ट ऑपरेशन यह दिखाता है कि भारत अपने व्यापारिक और ऊर्जा हितों की सुरक्षा को लेकर सक्रिय है। हालांकि क्षेत्रीय तनाव अभी भी बना हुआ है और लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों के सामने सुरक्षा चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में समुद्री स्थिति पर भारत समेत कई देशों की नजर बनी रहेगी।




