नई दिल्ली, 3 अगस्त।

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने वरिष्ठ भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी विश्वेश नेगी को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया है। विदेश मंत्रालय की ओर से सोमवार को इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी गई। माना जा रहा है कि यह नियुक्ति भारत की पश्चिम एशिया नीति और ईरान के साथ रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

विश्वेश नेगी 2002 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं। नियुक्ति से पहले वह विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) के पद पर कार्यरत थे। विदेश नीति, द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक मामलों में उनका लंबा अनुभव रहा है, जिसके चलते उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अनुभवी राजनयिक हैं विश्वेश नेगी

विश्वेश नेगी ने अपने कूटनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में उन्होंने विभिन्न देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने और विदेश नीति से जुड़े अहम विषयों पर काम किया। वर्ष 2022 में उन्होंने भारत सरकार के रक्षा विभाग में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं।

जल्द संभालेंगे तेहरान में कार्यभार

विदेश मंत्रालय के अनुसार, विश्वेश नेगी जल्द ही तेहरान पहुंचकर भारत के नए राजदूत के रूप में अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा और कूटनीतिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में भारत-ईरान संबंधों को नई मजबूती देने में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है।

भारत-ईरान संबंधों के लिए अहम नियुक्ति

ईरान भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, क्षेत्रीय संपर्क और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। दोनों देशों के बीच चाबहार बंदरगाह, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर लगातार संवाद होता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वेश नेगी का अनुभव दोनों देशों के बीच सहयोग को नई गति दे सकता है।

हाल ही में हुई थी उच्चस्तरीय बातचीत

इस नियुक्ति से पहले भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची से बातचीत की थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा पर चर्चा की थी। भारत ने स्पष्ट किया था कि वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। विश्वेश नेगी की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में बदलते हालात के बीच भारत अपने रणनीतिक और कूटनीतिक हितों को संतुलित रखते हुए क्षेत्रीय साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।