नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को दिल्ली से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। सुरक्षा कारणों से उन्होंने पूरे संबोधन के दौरान अपना कैमरा बंद रखा। इस दौरान वह भावुक नजर आईं और कहा कि "यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपनी जान दी थी।"

दिसंबर में वापसी के दिए संकेत

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना ने कहा कि वह दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौट सकती हैं। हालांकि उन्होंने वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई। इस दाैरान उन्होंने कहा कि समय आने पर इसकी जानकारी साझा करेंगी। मगर दिसंबर तक वह देश वापस लौट सकती हैं।

आंदोलन को बताया सुनियोजित

शेख हसीना ने कहा कि वर्ष 2024 में हुआ आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ था, बल्कि यह एक सुनियोजित और संगठित अभियान था। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के जरिए स्थिति संभालने की भरपूर कोशिश की, लेकिन कुछ समूहों ने छात्रों की मांगों को राजनीतिक आंदोलन में बदल दिया। और बांग्लादेश में अराजकता फैल गई।

मौजूदा हालात पर जताई चिंता

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने अपने देश को लगातार संकटों से जूझते देखा है।

उनके अनुसार, वर्तमान हालात उस बांग्लादेश से बिल्कुल अलग हैं, जिसकी कल्पना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान की गई थी। और जिसके लिए लाखों लोगों ने अपनी जान दी थी।

UN के आंकड़ों पर बेटे ने उठाए सवाल

इससे पहले शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा जारी मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि UN ने 2024 के विरोध प्रदर्शनों में 1,400 मौतों का उल्लेख किया है, जबकि सरकारी आंकड़े लगभग 800 मौतों की बात करते हैं। उन्होंने दावा किया कि अतिरिक्त आंकड़ों का आधार अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।