नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026 : कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु की थलपति विजय सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी उम्मीद जगी है। कावेरी वाटर मैनेजमेंट अथॉरिटी (CWMA) के निर्देश के मुताबिक कर्नाटक से तमिलनाडु के लिए पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को मामले को गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की थी। इसके बाद CJI सूर्यकांत ने गुरुवार को केस लिस्ट करने की बात कही।

कर्नाटक को रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश

कावेरी वाटर रेगुलेशन कमेटी (CWRC) ने 28 जुलाई 2026 को हुई बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। इसके बाद 30 जुलाई को कावेरी वाटर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने इस फैसले को मंजूरी दे दी। तमिलनाडु का आरोप है कि कर्नाटक की ओर से CWMA के निर्देश के मुताबिक पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया।

सुप्रीम कोर्ट पहुंची थलपति विजय सरकार

CWMA के निर्देशों के पालन में कथित देरी के बाद तमिलनाडु सरकार तीन अगस्त को सुप्रीम कोर्ट पहुंची। राज्य सरकार ने मांग की है कि कर्नाटक को 12 अगस्त या उससे पहले 15 दिनों की अवधि के लिए रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया जाए। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि कावेरी नदी से निर्धारित पानी नहीं मिलने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में CWMA के निर्देशों को लागू कराना बेहद जरूरी है।

कावेरी पानी को लेकर लंबे समय से विवाद

कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर कई बार राजनीतिक और कानूनी टकराव की स्थिति बन चुकी है। मौजूदा विवाद में CWMA ने कर्नाटक को काबिनी और कृष्णा राजा सागर जलाशयों से तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। इसी फैसले के पालन को लेकर अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।

डीएमके भी सुप्रीम कोर्ट पहुंची

कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके भी सुप्रीम कोर्ट में अलग याचिका दाखिल कर चुकी है। ऐसे में गुरुवार की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। इस बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय कावेरी विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए कर्नाटक जाने की इच्छा भी जाहिर कर चुके हैं। हालांकि, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की ओर से मौजूदा परिस्थितियों में इस पहल को उचित नहीं बताए जाने के बाद उनकी प्रस्तावित यात्रा टल गई। अब सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को होने वाली सुनवाई से यह साफ होने की उम्मीद है कि CWMA के पानी छोड़ने के निर्देश को किस तरह लागू कराया जाएगा और कावेरी जल विवाद में आगे की दिशा क्या होगी।