नई दिल्ली, 8 अगस्त 2026: वक्फ संस्थाओं को अदालत की फीस देने से छूट है या नहीं, इस सवाल पर अब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर शीर्ष अदालत ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है, जिसमें कोर्ट फीस जमा नहीं करने पर वक्फ से जुड़े मामलों को खारिज करने के आदेश को बरकरार रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए संबंधित पक्षों से छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। यह याचिका अहमदाबाद सुन्नी मुस्लिम वक्फ समिति की ओर से दाखिल की गई है।

क्या था गुजरात हाईकोर्ट का फैसला ?

गुजरात हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में वक्फ संस्थाओं की ओर से दाखिल कई याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इन याचिकाओं में गुजरात राज्य वक्फ न्यायाधिकरण के उन आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिनमें निर्धारित कोर्ट फीस जमा नहीं होने के कारण वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों पर आगे की कार्रवाई से इनकार किया गया था। इसके बाद जनवरी 2026 में हाईकोर्ट ने अपने पहले के फैसले के आधार पर स्पष्ट किया कि वक्फ संस्थाओं को राज्य वक्फ न्यायाधिकरण के सामने चलने वाली कार्यवाही में कोर्ट फीस से पूरी तरह छूट हासिल नहीं है।

अहमदाबाद सुन्नी मुस्लिम वक्फ समिति ने क्या कहा ?

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अहमदाबाद सुन्नी मुस्लिम वक्फ समिति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। समिति की ओर से अधिवक्ता एजाज मकबूल ने याचिका दाखिल की है। याचिका में दलील दी गई है कि संबंधित वक्फ कानून और उसके नियमों में कोर्ट फीस के भुगतान का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। समिति का कहना है कि कानून में ऐसी कार्यवाही के लिए फीस की अनिवार्यता नहीं बताई गई है, इसलिए वक्फ संस्थाओं से कोर्ट फीस मांगना उचित नहीं है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था ?

गुजरात हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि वक्फ कानून की धारा 83 के तहत राज्य वक्फ न्यायाधिकरण में शुरू की गई कार्यवाही के लिए वक्फ संस्थाओं को कोर्ट फीस से पूरी तरह छूट नहीं दी गई है। वक्फ संस्थाओं की ओर से यह तर्क दिया गया था कि धारा 83 के तहत मामला सामान्य मुकदमे की तरह नहीं बल्कि आवेदन के माध्यम से शुरू होता है, इसलिए उस पर कोर्ट फीस लागू नहीं होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया था।

अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा ?

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए नोटिस जारी कर दिया है। संबंधित पक्षों को छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। अब शीर्ष अदालत यह देखेगी कि वक्फ न्यायाधिकरण में इस तरह की कार्यवाही पर कोर्ट फीस लागू होती है या नहीं और वक्फ संस्थाओं को किसी वैधानिक छूट का लाभ मिलता है या नहीं। इस मामले के फैसले का असर गुजरात में वक्फ संपत्तियों से जुड़े मुकदमों और राज्य वक्फ न्यायाधिकरण की कार्यवाही पर पड़ सकता है।