नई दिल्ली | 1 अगस्त

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखाई देने लगा है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने सभी राज्यों के रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) को सलाह जारी करते हुए कहा है कि पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित पात्र हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के रजिस्ट्रेशन और निर्माण पूरा करने की समयसीमा में चार महीने का विस्तार दिया जाए।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल उन परियोजनाओं पर लागू होगी, जो मौजूदा परिस्थितियों से प्रभावित हुई हैं और जिनकी मूल, संशोधित या पहले से बढ़ाई गई पूर्णता तिथि 28 फरवरी 2026 या उसके बाद की है।

युद्ध जैसी स्थिति मानने की सिफारिश

मंत्रालय ने अपने परामर्श में वित्त मंत्रालय के 29 अप्रैल 2026 के कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों को सरकारी अनुबंधों में 'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure) यानी युद्ध जैसी अप्रत्याशित स्थिति माना जा सकता है। RERA अधिनियम में भी ऐसी परिस्थितियों में परियोजनाओं की समयसीमा बढ़ाने का प्रावधान है।

ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित, निर्माण पर असर

सरकार के अनुसार पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इससे निर्माण सामग्री की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ा है, जिसके चलते कई रियल एस्टेट परियोजनाओं का निर्माण समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है।

RERA को एक समान आदेश जारी करने की सलाह

मंत्रालय ने RERA अधिनियम की धारा 7(3) का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राधिकरण परियोजना का पंजीकरण रद्द करने के बजाय उचित शर्तों के साथ उसे जारी रखने की अनुमति दे सकता है। साथ ही राज्यों के RERA से कहा गया है कि वे प्रत्येक बिल्डर से अलग-अलग आवेदन लेने के बजाय पात्र परियोजनाओं के लिए एक समान आदेश जारी कर सकते हैं।

बिल्डरों ने किया स्वागत, खरीदारों ने जताई चिंता

रियल एस्टेट संगठन NAREDCO ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि निर्माण सामग्री की कमी और बढ़ती लागत के कारण परियोजनाओं में देरी हुई है, इसलिए यह राहत आवश्यक है। वहीं, कई होमबायर्स और उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे पहले से देरी कर रहे बिल्डरों को फायदा मिल सकता है, जबकि घर खरीदारों को अपने फ्लैट का कब्जा पाने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।