नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026 : FCRA संशोधन विधेयक 2026 को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बयानबाजी सामने आई है। अमेरिकी सांसद राइली मूर ने प्रस्तावित FCRA विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर अपनी चिंता जताई थी। अब राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने राइली मूर की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रस्तावित कानून को लेकर अमेरिकी सांसद की चिंताएं बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई हैं और यह भारत की वास्तविक स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शातीं। सुजीत कुमार ने राइली मूर को लिखे पत्र में कहा कि एक भारतीय सांसद के तौर पर उनका दायित्व है कि वह विधेयक को लेकर उठाई गई चिंताओं का जवाब दें। उन्होंने विशेष रूप से FCRA संशोधन को भारतीय ईसाइयों की चिंताओं से जोड़ने पर आपत्ति जताई।

राइली मूर ने FCRA Bill पर क्या चिंता जताई ?

अमेरिकी सांसद राइली मूर ने प्रस्तावित Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को लेकर चिंता व्यक्त की थी। उनके अनुसार, विधेयक के कुछ प्रस्तावित प्रावधानों से चर्च और ईसाई संस्थाओं की संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ने की आशंका हो सकती है। अमेरिकी सांसद राइली मूर ने इसे भारत में ईसाई समुदाय से जुड़े मुद्दे के रूप में उठाते हुए कहा था कि ऐसे प्रावधानों का भारत-अमेरिका संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।

सुजीत कुमार ने अमेरिकी सांसद को क्या जवाब दिया ?

सुजीत कुमार ने अपने पत्र में राइली मूर की टिप्पणी को प्रस्तावित कानून की ‘बढ़ा-चढ़ाकर और गलत तरीके से पेश की गई तस्वीर’ बताया। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश के सांसद को भारत के कानून पर टिप्पणी करने से पहले विधेयक के वास्तविक प्रावधानों और उसके उद्देश्य को समझना चाहिए। सुजीत कुमार ने यह भी कहा कि इस तरह की गलत समझ पर आधारित टिप्पणियां भारत-अमेरिका संबंधों के लिए उचित नहीं हैं।

FCRA संशोधन विधेयक में क्या प्रस्ताव है ?

प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक में विदेशी योगदान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के पंजीकरण और उससे जुड़ी संपत्तियों की निगरानी को लेकर प्रावधान किए जाने की बात कही गई है। प्रस्ताव के अनुसार, यदि किसी संस्था का FCRA पंजीकरण समाप्त हो जाता है और वह निर्धारित अवधि में इसे बहाल नहीं कराती, तो उससे जुड़ी विदेशी फंड से अर्जित संपत्तियों को लेकर नियामकीय कार्रवाई की व्यवस्था हो सकती है। सरकार का तर्क है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी को मजबूत करना है।

भारत में भी FCRA Bill को लेकर विरोध

FCRA संशोधन विधेयक को लेकर देश के भीतर भी राजनीतिक बहस जारी है। विपक्षी दलों ने प्रस्तावित बदलावों पर सवाल उठाते हुए इसे NGO और विदेशी फंड प्राप्त करने वाली संस्थाओं पर अतिरिक्त नियंत्रण बढ़ाने वाला कदम बताया है। विपक्ष की ओर से विधेयक को वापस लेने या इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की मांग भी उठाई गई है। फिलहाल FCRA संशोधन विधेयक को लेकर भारत में राजनीतिक बहस के साथ-साथ अमेरिकी सांसद की टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया सामने आ चुकी है। सुजीत कुमार ने स्पष्ट किया है कि विधेयक को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उसके वास्तविक प्रावधानों को समझना जरूरी है।