नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026

दिल्ली में हाल ही में हुए छात्र आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (IG) अमिताभ ठाकुर ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लेटर पिटीशन भेजी है। उन्होंने आंदोलन से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं किए गए, तो महत्वपूर्ण साक्ष्यों के नष्ट होने या उनमें छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग

अपने पत्र में अमिताभ ठाकुर ने अदालत से अनुरोध किया है कि घटना से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को न्यायिक संरक्षण प्रदान किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से सीसीटीवी फुटेज, बॉडी-वॉर्न कैमरा रिकॉर्डिंग, ड्रोन फुटेज, मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की है।

क्रिप्टोग्राफिक हैशिंग तकनीक का सुझाव

पूर्व आईजी ने पत्र में कहा कि डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उन्हें क्रिप्टोग्राफिक हैशिंग तकनीक के माध्यम से संरक्षित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना कम होगी और जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सकेगी।

जनहित याचिका दायर करने की तैयारी

अमिताभ ठाकुर ने यह भी बताया कि पूरे मामले को लेकर एक विस्तृत जनहित याचिका (PIL) तैयार की जा रही है, जिसे जल्द ही दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किया जाएगा। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि याचिका दाखिल होने से पहले ही संबंधित एजेंसियों को सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाएं।

जांच में अहम हो सकते हैं डिजिटल रिकॉर्ड

पत्र में कहा गया है कि किसी भी संवेदनशील मामले की निष्पक्ष जांच में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करना न्यायिक प्रक्रिया और तथ्यों की निष्पक्ष जांच के लिए आवश्यक है। फिलहाल इस लेटर पिटीशन पर अदालत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।