कैबिनेट ने नई नियमावली को दी मंजूरी
पटना: बिहार में सड़क यात्रा अब पहले से महंगी होने वाली है। राज्य सरकार ने पहली बार स्टेट हाईवे (SH), प्रमुख पुलों और बाइपास पर भी टोल टैक्स वसूलने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में 'पथ उपयोगकर्ता शुल्क नियमावली-2026' को मंजूरी दे दी गई। अब तक टोल टैक्स मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर ही लिया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य सरकार द्वारा विकसित और संचालित प्रमुख सड़कों का उपयोग करने पर भी शुल्क देना होगा।
क्या है नई व्यवस्था?
नई नियमावली के तहत राज्य सरकार द्वारा निर्मित या उन्नत किए गए स्टेट हाईवे, बड़े पुल, बाइपास और अन्य अधिसूचित मार्गों पर यात्रा करने वाले वाहनों से तय दरों के अनुसार टोल टैक्स लिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस राशि का उपयोग सड़कों के रखरखाव, मरम्मत और नई सड़क परियोजनाओं के विकास में किया जाएगा।
कार और निजी वाहनों के लिए क्या होगी दर?
सरकार ने कार, जीप और वैन जैसे हल्के निजी वाहनों के लिए 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर की दर तय की है। यानी जितनी दूरी तय होगी, उसी हिसाब से शुल्क देना होगा।
1. संभावित टोल शुल्क इस प्रकार हो सकता है
2. पटना से भागलपुर (लगभग 240 किमी): करीब ₹300
3. पटना से दरभंगा (लगभग 150 किमी): करीब ₹190–₹200
4. पटना से गया (लगभग 100 किमी): लगभग ₹125
5. पटना से मुजफ्फरपुर (लगभग 75 किमी): करीब ₹94
यह राशि दूरी के आधार पर अनुमानित है। अंतिम शुल्क संबंधित टोल प्लाजा और अधिसूचित मार्ग के अनुसार तय होगा।
1. छोटे कमर्शियल वाहन: ₹2 प्रति किलोमीटर
2. दो एक्सल वाले बस और ट्रक: ₹4.25 प्रति किलोमीटर
3. भारी निर्माण वाहन: ₹6.65 प्रति किलोमीटर
4. सात एक्सल और उससे बड़े भारी वाहन: ₹8.10 प्रति किलोमीटर तक
सरकार का मानना है कि भारी वाहनों से सड़क को अधिक नुकसान पहुंचता है, इसलिए उनके लिए अधिक शुल्क निर्धारित किया गया है।
FASTag से होगी पूरी वसूली
नई व्यवस्था में टोल संग्रह पूरी तरह डिजिटल होगा। इसके लिए FASTag और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे टोल प्लाजा पर नकद भुगतान की जरूरत कम होगी और वाहनों की आवाजाही भी तेज होगी।
हर साल बढ़ सकती हैं टोल दरें
नियमावली में यह भी प्रावधान किया गया है कि सड़कों के रखरखाव की लागत, महंगाई दर और अन्य आर्थिक मानकों को देखते हुए टोल टैक्स की दरों की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर हर वर्ष शुल्क में संशोधन किया जा सकेगा।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
राज्य सरकार का कहना है कि बिहार में पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में नई सड़कें, पुल और बाइपास बनाए गए हैं। इनका रखरखाव और मरम्मत लगातार महंगा होता जा रहा है। ऐसे में 'यूज़र पे' (User Pay) मॉडल अपनाकर सड़क उपयोगकर्ताओं से शुल्क लेकर सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाए रखने की योजना तैयार की गई है।
वाहन मालिकों पर क्या होगा असर?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद रोजाना स्टेट हाईवे का उपयोग करने वाले निजी और व्यावसायिक वाहन चालकों की यात्रा लागत बढ़ेगी। खासकर मालवाहक वाहनों के परिवहन खर्च में वृद्धि होने की संभावना है, जिसका असर भविष्य में माल ढुलाई और कुछ वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि सरकार का दावा है कि बेहतर सड़कें, तेज यात्रा और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था के लिए यह कदम जरूरी है।
नई टोल नीति लागू होने के बाद राज्य सरकार जल्द ही उन स्टेट हाईवे, पुलों और बाइपास की सूची जारी करेगी, जहां सबसे पहले टोल संग्रह शुरू किया जाएगा। इससे वाहन चालकों को पहले से यह जानकारी मिल सकेगी कि किन मार्गों पर यात्रा के दौरान टोल शुल्क देना होगा।




