काठमांडू | 1 अगस्त

पड़ोसी देश नेपाल के भारत से सटे मधेस क्षेत्र में हाल के दिनों में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद तनाव अब भी बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, धार्मिक जुलूस के दौरान शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया, जिसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हुई और कई अन्य लोग घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है और नेपाल सेना तथा सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है।

धार्मिक जुलूस के दौरान शुरू हुआ विवाद

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 26 जुलाई को सुनसरी जिले के देवानगंज क्षेत्र में सावन के अवसर पर निकाले जा रहे एक धार्मिक जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच विवाद हो गया। विवाद बढ़ने के बाद पत्थरबाजी शुरू हो गई और हालात बिगड़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। मगर पुलिस कार्रवाई के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य लोग घायल हो गए।

दूसरे जिलों तक फैला तनाव

प्रारंभिक घटना के बाद मधेस के अन्य इलाकों में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। 30 जुलाई को सिराहा जिले में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में एक 15 वर्षीय किशोर की मौत हो गई। इसके बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं।

सेना की तैनाती, पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा

क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नेपाल सरकार ने सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स को प्रभावित क्षेत्रों में गश्त के लिए तैनात किया है। अधिकारियों और मृतकों के परिजनों के बीच हुई बातचीत के बाद प्रत्येक पीड़ित परिवार को 10 लाख नेपाली रुपये, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और अन्य सहायता देने की घोषणा की गई।

भारत के लिए भी बढ़ी चिंता

मधेस क्षेत्र भारत-नेपाल सीमा से लगा हुआ है, जहां दोनों देशों के लोगों के बीच लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध हैं। खुली सीमा और लोगों की आसान आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा से जुड़े क्षेत्रों में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है।