नई दिल्ली, 5 अगस्त। भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) ने वाणिज्यिक संचालन शुरू होने के बाद से अब तक 1000 बिलियन यूनिट (BU) से अधिक परमाणु बिजली उत्पादन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। इस उपलब्धि को देश की स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ ऊर्जा यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। NPCIL ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह उपलब्धि भारत के ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने और कम कार्बन उत्सर्जन वाली बिजली उत्पादन प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
860 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन टला
NPCIL के अनुसार, 1000 बिलियन यूनिट परमाणु बिजली उत्पादन के कारण 860 मिलियन टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के बराबर उत्सर्जन को रोका जा सका है। परमाणु ऊर्जा को विश्वसनीय और कम कार्बन उत्सर्जन वाला ऊर्जा स्रोत माना जाता है, जो जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में अहम भूमिका निभाता है।
इतना बड़ा है इसका पर्यावरणीय प्रभाव
विशेषज्ञों की मानें तो 860 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी का मतलब लगभग 18.7 करोड़ पेट्रोल और डीजल से चलने वाली कारों को एक वर्ष तक सड़कों से हटाने के बराबर है। यह उत्सर्जन जर्मनी या जापान जैसे बड़े औद्योगिक देशों के वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के करीब माना जाता है।
2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 में घोषित 'न्यूक्लियर एनर्जी मिशन' के तहत वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट (GW) परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। केंद्र सरकार का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना और कोयले पर निर्भरता कम करना है।
ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
सरकार का मानना है कि परमाणु ऊर्जा से देश के ऊर्जा मिश्रण (Energy Mix) में भरोसेमंद और लगातार उपलब्ध रहने वाली बेस-लोड बिजली की हिस्सेदारी बढ़ेगी। इससे उद्योगों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
2070 के नेट-जीरो लक्ष्य में अहम भूमिका
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु ऊर्जा क्षमता का विस्तार भारत के 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने में भी सहायता मिलेगी।




