नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026 ।

फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद राइली मूर की टिप्पणी के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि प्रस्तावित संशोधन धार्मिक संस्थाओं, विशेषकर चर्चों, को प्रभावित कर सकते हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर पक्ष और विपक्ष में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

क्या बोले राइली मूर ?

राइली मूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि भारत में प्रस्तावित FCRA संशोधन धार्मिक संस्थाओं पर असर डाल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा होता है तो इसका भारत-अमेरिका संबंधों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

सोशल मीडिया पर बढ़ी बहस

राइली मूर के बयान के बाद कई विदेशी और भारतीय सोशल मीडिया अकाउंट्स ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रखी। कुछ विदेशी संगठनों ने उनके बयान का समर्थन किया, जबकि भारत में अनेक यूजर्स ने इसे भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक टिप्पणी बताया।

FCRA क्या है ?

Foreign Contribution (Regulation) Act (FCRA) भारत में विदेशी स्रोतों से मिलने वाले चंदे (Foreign Funding) को विनियमित करने वाला कानून है। इसका उद्देश्य विदेशी फंड के उपयोग में पारदर्शिता और नियमन सुनिश्चित करना है। संसद में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर अभी विधायी प्रक्रिया जारी है।

आधिकारिक स्थिति

अब तक भारत सरकार की ओर से राइली मूर की टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं आई है। वहीं, प्रस्तावित FCRA संशोधनों पर संसद में चर्चा और विधायी प्रक्रिया जारी है।