नई दिल्ली | 2 जुलाई 2026
भारत का शेयर बाजार अब सिर्फ घरेलू निवेशकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। मजबूत निवेशक आधार, बेहतर वैल्यूएशन और लगातार बढ़ती रिटेल भागीदारी के चलते विदेशी कंपनियां अपनी भारतीय इकाइयों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध (IPO) कराने की तैयारी कर रही हैं।
इसी कड़ी में डेनमार्क की प्रमुख बीयर कंपनी Carlsberg ने अपनी भारतीय इकाई के IPO के लिए गोपनीय रूप से आवेदन दाखिल किया है। रिपोर्टों के अनुसार, यह IPO करीब 700 मिलियन डॉलर (लगभग 6,650 करोड़ रुपये) का हो सकता है। खास बात यह है कि इस इश्यू के जरिए कंपनी नई पूंजी नहीं जुटाएगी, बल्कि अपनी मौजूदा हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेगी।
क्यों बढ़ रहा है भारत पर विदेशी कंपनियों का भरोसा?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते पूंजी बाजारों में शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में लाखों नए निवेशक शेयर बाजार से जुड़े हैं, जिससे कंपनियों को बेहतर वैल्यूएशन मिलने लगी है। यही वजह है कि कई वैश्विक कंपनियां भारत में लिस्टिंग को रणनीतिक अवसर के रूप में देख रही हैं।
केवल कार्ल्सबर्ग ही नहीं, कई बड़ी कंपनियां कतार में
कार्ल्सबर्ग से पहले भी कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में IPO के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचने की दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं। बाजार में चर्चा है कि आने वाले महीनों में कई बड़े IPO देखने को मिल सकते हैं, जिससे भारतीय पूंजी बाजार की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या मायने?
विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी इस बात का संकेत है कि भारत का शेयर बाजार वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद निवेश गंतव्य बन चुका है। इससे निवेशकों को नए निवेश विकल्प मिलेंगे, बाजार की गहराई बढ़ेगी और भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश का प्रवाह भी मजबूत हो सकता है। हालांकि, किसी भी IPO में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, जोखिम और मूल्यांकन का सावधानीपूर्वक अध्ययन करना जरूरी है।
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भारत का शेयर बाजार बना वैश्विक कंपनियों की पहली पसंद, विदेशी कंपनियां क्यों ला रही हैं IPO?
भारत का शेयर बाजार अब वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। मजबूत निवेशक आधार, बेहतर वैल्यूएशन और IPO के अनुकूल माहौल के चलते कई विदेशी कंपनियां भारत में लिस्टिंग की तैयारी कर रही हैं। जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह और भारतीय निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है।

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