नई दिल्ली | 27 जुलाई 2026

वर्क फ्रॉम होम के बढ़ते चलन के बीच कई लोग सुविधा के लिए बिस्तर पर बैठकर ही ऑफिस का काम करने लगे हैं। हालांकि, वास्तु शास्त्र और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह आदत लंबे समय में नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। मान्यता है कि बिस्तर आराम और विश्राम की ऊर्जा से जुड़ा होता है, जबकि कार्यस्थल कर्म, अनुशासन और एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है।

विश्राम और काम की ऊर्जा में हो सकता है असंतुलन

वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, जब व्यक्ति लगातार बिस्तर पर बैठकर काम करता है तो आराम और काम से जुड़ी ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में बिस्तर को चंद्रमा और शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है, जो सुख, शांति और आराम के प्रतीक माने जाते हैं। वहीं कार्यस्थल को बुध और शनि से संबंधित माना जाता है, जो बुद्धि, मेहनत और अनुशासन का प्रतिनिधित्व करते हैं।

कहा जाता है कि दोनों स्थानों को मिलाने से ध्यान भटक सकता है, काम में मन नहीं लग सकता और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

करियर और आर्थिक स्थिति पर असर की मान्यता

वास्तु के अनुसार बिस्तर पर बैठकर काम करने से आलस्य, मानसिक तनाव और भ्रम बढ़ सकता है। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि इससे ऑफिस में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं और करियर में आगे बढ़ने के अवसरों पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा, बिस्तर पर बैठकर काम करना या भोजन करना घर की सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित करने वाला माना जाता है। इससे आर्थिक स्थिरता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की मान्यता है।

वास्तु के अनुसार अपनाएं ये उपाय

वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार काम करने के लिए अलग टेबल और कुर्सी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। घर में वर्क स्टेशन को उत्तर या पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। काम करते समय चेहरे का रुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखने की सलाह दी जाती है।

हालांकि, इन मान्यताओं के वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अलग वर्कस्पेस रखने से ध्यान केंद्रित करने, बेहतर दिनचर्या बनाने और वर्क-लाइफ बैलेंस सुधारने में मदद मिल सकती है।